Brij Bhushan Singh: "राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की हो रही उपेक्षा"; विनय कटियार के बयान का समर्थन कर बोले बृजभूषण शरण सिंह- 'मैं खुद अभी तक दर्शन करने नहीं गया'

Brij Bhushan Singh: "Those associated with the Ram Mandir movement are being sidelined"; endorsing Vinay Katiyar's statement, Brij Bhushan Sharan Singh said, "I myself haven't gone for *darshan* yet."
 
Brij Bhushan Singh: "राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की हो रही उपेक्षा"; विनय कटियार के बयान का समर्थन कर बोले बृजभूषण शरण सिंह- 'मैं खुद अभी तक दर्शन करने नहीं गया'

राजनीतिक डेस्क, लखनऊ (18 जून 2026):  गोंडा की कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद की व्यवस्थाओं और आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर एक बड़ा और विस्फोटक बयान दिया है। बृजभूषण शरण सिंह ने भाजपा के फायरब्रांड नेता और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे विनय कटियार के उस बयान का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने आंदोलनकारियों की उपेक्षा होने की बात कही थी।

पूर्व सांसद ने कहा कि विनय कटियार द्वारा उठाया गया सवाल शत-प्रतिशत सही है। मंदिर निर्माण के बाद सबसे ज्यादा मानसिक और व्यावहारिक परेशानी उन्हीं स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं को झेलनी पड़ रही है, जिन्होंने इस आंदोलन को खड़ा करने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था।

देवीपाटन, बस्ती और अयोध्या के लोगों ने दिया सबसे बड़ा योगदान

बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि इस पूरे अभियान में वर्तमान देवीपाटन मंडल (गोंडा-बलरामपुर क्षेत्र), बस्ती, अयोध्या और बाराबंकी के आम जनमानस की भागीदारी सबसे अधिक थी। इन इलाकों के लोगों ने आंदोलन को धार देने के लिए धन, जनशक्ति और हर संभव सहयोग बढ़-चढ़कर दिया था।

उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि पहले इन क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालु नियमित रूप से अयोध्या जाकर सरयू स्नान करते थे और नागेश्वर नाथ व हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करते थे। कई सनातनियों का तो नियम था कि वे अयोध्या में दर्शन किए बिना पानी तक नहीं पीते थे। लेकिन भव्य मंदिर बनने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और जगह-जगह लगाए गए बैरियरों के कारण आम श्रद्धालुओं की पहुंच बेहद मुश्किल हो गई है। जिन लोगों ने लाठियां खाईं और आंदोलन मजबूत किया, वे आज अपने ही क्षेत्र में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

बैरियर व्यवस्था ने बढ़ाई दूरी, चुनाव नतीजों पर भी पड़ा असर

अयोध्या और उसके आसपास के जनपदों में लगाए गए कड़े सुरक्षा बैरियरों पर तीखा सवाल उठाते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि कई रास्तों को वर्षों तक अकारण बंद रखा गया, जिससे स्थानीय जनता को अपने रोजमर्रा के कामों और अयोध्या पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बृजभूषण ने इस प्रशासनिक व्यवस्था को राजनीतिक नुकसान से जोड़ते हुए दावा किया कि अयोध्या, अंबेडकरनगर, बस्ती और बाराबंकी जैसे क्षेत्रों में हालिया चुनावी नतीजों पर जनता के इसी आक्रोश का सीधा असर दिखाई दिया। जनता की इस जमीनी नाराजगी का खामियाजा अंततः पार्टी को भुगतना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि बैरियर व्यवस्था और पास सिस्टम को लेकर लोगों में लंबे समय से गहरा असंतोष व्याप्त था, लेकिन इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया।

"जब विनय कटियार को पास की जरूरत, तो मैं खुद अभी तक दर्शन करने नहीं गया"

बृजभूषण शरण सिंह ने एक हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहा कि वह स्वयं भव्य राम मंदिर बनने के बाद से अब तक वहां दर्शन करने नहीं गए हैं। उन्होंने इसके पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए कहा जब आंदोलन की अगुवाई करने वाले विनय कटियार जैसे वरिष्ठ नेता को भी भगवान के दर्शन के लिए पहचान पत्र दिखाने और विशेष पास संबंधी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, तो आम नागरिकों और साधारण कार्यकर्ताओं की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासन को मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की भावनाओं और आत्मसम्मान को समझना चाहिए। श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन के लिए अधिक सहज, सरल और गरिमापूर्ण व्यवस्था मिलनी चाहिए।"

जान से मारने की धमकी पर बोले- "मैं डरने वाला नहीं"

पिछले दिनों मिली कथित धमकियों और सुरक्षा के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह इन सब बातों को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेते हैं। सार्वजनिक जीवन में इस तरह की बातें और धमकियां आती रहती हैं। संभव है कि किसी सिरफिरे व्यक्ति ने पब्लिसिटी के लिए ऐसा कृत्य किया हो। वह ऐसी गीदड़ भभकियों से डरने वाले नहीं हैं और उनका पूरा ध्यान केवल जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने पर केंद्रित है।बृजभूषण शरण सिंह के इस बेबाक बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर अयोध्या की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, स्थानीय जन-आक्रोश और मंदिर आंदोलन के पुराने नायकों की वर्तमान भूमिका को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

Tags