भूरा भाई का मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट
(मुकेश "कबीर" – विभूति फीचर्स)
अमेरिका वाले “भूरा भाई” ने आखिरकार दुनिया को यह ज्ञान दे ही दिया कि भारत नर्क है। फिर कुछ देर बाद बोले—नहीं, भारत तो महान देश है। उसके बाद चीन को भी नर्क घोषित कर दिया। अब आम आदमी समझ नहीं पा रहा कि आखिर स्वर्ग बचा कहां है? शायद वही जगह जहां खुद भूरा भाई रहते हैं।
हालांकि, भूरा भाई की बातें समझना आसान नहीं। वे अक्सर पहले बयान देते हैं, फिर बाद में उसका मतलब खोजते हैं। कभी किसी देश पर हमला कर देते हैं और फिर दुनिया से पूछते फिरते हैं कि वजह क्या थी। ऐसे में उनके बयानों को गंभीरता से लेना भी अपने आप में एक साहसिक काम है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत और चीन उन्हें नर्क दिखाई देते हैं, लेकिन पाकिस्तान कभी नर्क नहीं लगता। शायद इसलिए क्योंकि कुछ देशों की उपयोगिता मौसम के वाइपर जैसी होती है—बारिश तक जरूरी, उसके बाद स्टोर रूम में फेंक दिए जाने वाले।

भूरा भाई की भारत और चीन से नाराज़गी की वजह भी बड़ी दिलचस्प है। पहली वजह तो वही पुराना “मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट” है, जो उनके स्वभाव में फिट होकर आया है। दूसरी वजह है खुन्नस। उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया उनके हर फैसले पर ताली बजाएगी, लेकिन भारत ने अपनी राह चुनी और चीन ने भी हर मुद्दे पर हामी भरने से इनकार कर दिया।
कभी चीन को अपना खास साथी समझने वाले भूरा भाई अब उसी पर नाराज़ हैं। बचपन की कहानियों में चूहा जाल काटकर बिल्ली को बचा लेता था, लेकिन अब दुनिया समझदार हो गई है। अब कोई चूहा यह जोखिम नहीं उठाता कि जाल काटने के बाद खुद ही बिल्ली का भोजन बन जाए।
भारत की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां लोग डरते कम और सवाल ज्यादा पूछते हैं। यहां की राजनीति भी कुछ अलग है। कोई “फैमिली पैकेज” वाला सिस्टम नहीं कि किसी नेता को परिवार समेत उठा लिया जाए। यहां तो कुंवारों की सरकार तक चल जाती है, इसलिए धमकियों का असर भी सीमित रहता है। शायद इसी वजह से कभी भारत को नर्क कहा जाता है और कुछ घंटों बाद महान देश। क्योंकि आखिरकार दुनिया को भी समझ आ जाता है कि भारत को शब्दों से नहीं, समझ से पढ़ना पड़ता है।
बाकी जो भी हो, अंत में इतना कहना तो बनता ही है—
मेरा भारत महान।
जय हिंद।
