सावधान! दर्द को न समझें सामान्य समस्या: फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. ओम जी तिवारी से जानें बिना सर्जरी स्थायी राहत पाने के तरीके

Beware! Don't dismiss pain as a minor issue: Learn how to get permanent relief without surgery from physiotherapist Dr. Om Ji Tiwari.
 
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हेल्थ डेस्क: आधुनिक और भागदौड़ भरी जीवनशैली में शरीर के किसी न किसी हिस्से में दर्द होना एक बेहद आम बात बन गई है। अक्सर लोग इसे थकान या सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टरी सलाह के पेन किलर्स (दर्द निवारक दवाएं) खाने लगते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।

लखनऊ के सुप्रसिद्ध फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. ओम जी तिवारी (P.T.) के अनुसार, दर्द केवल एक सामान्य लक्षण नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर का वह महत्वपूर्ण अलार्म या संकेत है जो अंदरूनी रूप से किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करता है। यदि किसी भी प्रकार का दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो यह सीधे तौर पर व्यक्ति की कार्यक्षमता, उसके मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। अच्छी बात यह है कि आज आधुनिक पेन मैनेजमेंट और फिजियोथेरेपी तकनीकों की मदद से बिना किसी सर्जरी के भी पुराने से पुराने और जटिल दर्द का प्रभावी व स्थायी उपचार संभव है।

दर्द के प्रकार: एक्यूट बनाम क्रॉनिक पेन

डॉ. ओम जी तिवारी ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में दर्द को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है:

  1. तीव्र दर्द (Acute Pain): यह दर्द किसी चोट, संक्रमण, हाल ही में हुए ऑपरेशन या अचानक आई सूजन के कारण होता है। यह तीव्र होता है लेकिन उचित चिकित्सकीय देखभाल और फिजियोथेरेपी से कुछ दिनों या हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो जाता है।

  2. दीर्घकालिक दर्द (Chronic Pain): जब कोई दर्द तीन महीने या उससे अधिक समय तक लगातार बना रहे, तो उसे क्रॉनिक पेन कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से पुरानी कमर का दर्द (Back Pain), गर्दन का दर्द (Cervical), घुटनों का दर्द (Arthritis), नसों का दर्द (Sciatica/Neuralgia) और कंधे का दर्द (Frozen Shoulder) शामिल हैं।

इन 5 लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

डॉ. तिवारी ने सलाह दी है कि यदि आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • यदि दर्द कई दिनों से लगातार बना हुआ है और आराम करने पर भी ठीक नहीं हो रहा।

  • रात के समय या सोते वक्त दर्द की तीव्रता अचानक बढ़ जाती हो।

  • हाथ या पैरों में सुन्नपन (Numbness), झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना (जो नसों पर दबाव का संकेत है)।

  • दर्द के कारण आपकी दैनिक नींद बुरी तरह प्रभावित हो रही हो।

  • सामान्य दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) का असर खत्म होते ही दर्द दोबारा लौट आता हो।

बिना सर्जरी दर्द से मुक्ति: फिजियोथेरेपी और पुनर्वास

आजकल चिकित्सा जगत में आधुनिक पेन मैनेजमेंट, फिजियोथेरेपी पुनर्वास (Rehabilitation) और जीवनशैली में वैज्ञानिक सुधार जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाता है। ये पद्धतियां दर्द के मूल कारण (Root Cause) को पकड़कर उसे ठीक करती हैं, न कि केवल दर्द के लक्षणों को दबाती हैं।

दर्द से बचाव के लिए डॉ. ओम जी तिवारी की मुख्य सलाह:

  • सही शारीरिक मुद्रा (Posture): बैठते, उठते या मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को हमेशा सीधा रखें। गलत पोस्चर दर्द का सबसे बड़ा कारण है।

  • सक्रिय दिनचर्या: रोजाना हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग या वॉक करें। लंबे समय तक (जैसे ऑफिस वर्किंग ऑवर्स में) एक ही स्थिति में बैठकर काम करने से बचें; हर एक घंटे में छोटा ब्रेक लें।

  • वजन और बीमारियां: अपने शरीर का वजन नियंत्रित रखें क्योंकि अतिरिक्त वजन घुटनों और कमर पर दबाव डालता है। इसके अलावा, मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) जैसी क्रॉनिक बीमारियों को हमेशा काबू में रखें, क्योंकि ये नसों को कमजोर करती हैं।

  • पेन किलर्स से बचें: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना किसी डॉक्टरी या चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें। यह किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

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