जनगणना 2027: देश की पहली डिजिटल गणना को तैयार डेटा गोपनीयता पर सख्त पहरा

Census 2027: India's first digital census underway, data privacy under strict surveillance
 
जनगणना 2027: देश की पहली डिजिटल गणना को  तैयार डेटा गोपनीयता पर सख्त पहरा

नई दिल्ली | 31 मार्च 2026  भारत अपनी आठवीं स्वतंत्रता-पश्चात् जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार है। रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने स्पष्ट किया है कि जनगणना 2027 न केवल आधुनिक तकनीक से लैस होगी, बल्कि डेटा सुरक्षा के मामले में भी अभेद्य होगी। इस बार की गणना 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट के साथ पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी।

डेटा गोपनीयता: RTI और अदालतों से भी बाहर

जनगणना आयुक्त ने जनगणना अधिनियम की धारा 15 का हवाला देते हुए नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनका व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा।

  • गोपनीयता: एकत्र की गई जानकारी न तो RTI के तहत साझा की जाएगी और न ही किसी अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकती है।

  • सुरक्षा: डेटा केंद्रों को 'महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना' (Critical Information Infrastructure) घोषित किया गया है ताकि एंड-टू-एंड सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

पहली बार 'लिव-इन रिलेशनशिप' को मान्यता

इस बार की जनगणना में एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिलेगा। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है और अपने संबंध को स्थायी मानता है, तो उन्हें गणना के दौरान 'विवाहित' श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यह कदम बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को सांख्यिकी में जगह देने का प्रयास है।

महत्वपूर्ण तिथियां और चरण

जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी:

  1. प्रथम चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग): यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। इसमें घर और उसमें उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे।

  2. द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): मुख्य गणना फरवरी 2027 में होगी।

    • संदर्भ तिथि: पूरे देश के लिए 1 मार्च 2027 निर्धारित है।

    • बर्फबारी वाले क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 तय की गई है।

स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों के पास होगा अधिकार

डिजिटल प्रणाली के तहत नागरिकों को 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' की सुविधा मिलेगी। हाउस लिस्टिंग शुरू होने से पहले 15 दिनों के लिए एक पोर्टल खुलेगा, जहाँ लोग स्वयं अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रगणकों (Enumerators) पर निर्भरता कम होगी और डेटा की सटीकता बढ़ेगी।

अधिकारियों को सख्त चेतावनी और दंड

जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही अक्षम्य होगी। 17 मार्च को जारी पत्र के अनुसार:

  • डेटा का दुरुपयोग, आपत्तिजनक सवाल पूछना या कार्य में बाधा डालना अपराध माना जाएगा।

  • दोषियों को 1,000 रुपये जुर्माने से लेकर 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

बड़े स्तर पर प्रशिक्षण और जनशक्ति

इस विशाल राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने के लिए देशभर में 30 लाख प्रगणक, पर्यवेक्षक और अधिकारी तैनात किए जाएंगे। डेटा संग्रह के लिए सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग होगा। वर्तमान में 80,000 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण बैच सक्रिय हैं।

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