सीएचसी अधीक्षक पर सिविल सेवा नियमों की अनदेखी का आरोप, विजिटर को सौंपी विभागाध्यक्ष की कुर्सी
विभागीय जानकारों का कहना है कि यह आचरण सिविल सेवा नियमों एवं प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं है। नियमों के अनुसार विभागाध्यक्ष (HOD) की कुर्सी पद की गरिमा और जिम्मेदारी से जुड़ी होती है, जिस पर केवल पदस्थ अधिकारी को ही बैठना चाहिए। किसी भी विज़िटिंग अधिकारी, जनप्रतिनिधि या अन्य कर्मचारी को उस कुर्सी पर बैठाना नियमसम्मत नहीं माना जाता।
सिविल सेवा नियम क्या कहते हैं?
सिविल सेवा नियमावली के अनुसार, यदि कोई वरिष्ठ अधिकारी या विज़िटिंग ऑफिसर विभाग में आता है, तो शिष्टाचारवश विभागाध्यक्ष अपनी कुर्सी छोड़कर बगल में बैठ सकता है, लेकिन अपनी आधिकारिक कुर्सी पर अतिथि को बैठाना उचित नहीं है। प्रोटोकॉल स्पष्ट करता है कि विज़िटिंग अधिकारी को अतिथि कुर्सी पर ही बैठाया जाना चाहिए।
अधीक्षक का पक्ष
मामले पर दूरभाष से संपर्क करने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. राहुल सोनकर ने बताया कि एससी/एसटी आयोग की सदस्य अनीता गौतम निरीक्षण के लिए आई थीं और वे एक उच्च पद पर थीं, इसलिए सम्मान स्वरूप उन्हें अपनी कुर्सी पर बैठाया गया। उन्होंने इसे अपना दायित्व बताया। हालांकि, जानकारों का मानना है कि चाहे विज़िटर कितना ही वरिष्ठ क्यों न हो, सिविल सेवा नियमों और प्रशासनिक गरिमा का पालन किया जाना अनिवार्य है।
