शतरंज की बिसात पर बढ़ता छत्तीसगढ़
(हेमन्त खुटे – विभूति फीचर्स) छत्तीसगढ़ में शतरंज अब केवल मनोरंजन या समय बिताने का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की एक सशक्त खेल पहचान के रूप में उभर रहा है। बीते कुछ वर्षों में बच्चों, युवाओं और अभिभावकों के बीच शतरंज के प्रति बढ़ती रुचि ने इस बौद्धिक खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। लगातार बढ़ती प्रतियोगिताएँ, सक्रिय प्रशिक्षण शिविर, शतरंज अकादमियाँ और खिलाड़ियों की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि छत्तीसगढ़ में शतरंज अब भविष्य का मजबूत खेल बन चुका है।
प्रदेश के लगभग सभी जिलों में नियमित रूप से शतरंज प्रतियोगिताओं का आयोजन हो रहा है। स्कूल, जिला और राज्य स्तर की स्पर्धाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को निरंतर प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव मिल रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ और उससे संबद्ध जिला इकाइयों के सतत प्रयासों से शतरंज को राज्य में एक सुदृढ़ और विशिष्ट पहचान मिली है।
आज स्थिति यह है कि अंडर-7 और अंडर-9 जैसी कम आयु वर्ग से ही खिलाड़ी शतरंज की बारीकियाँ सीखकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग प्राप्त कर चुके हैं और राज्य में शतरंज खिलाड़ियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। विद्यालयों में भी शतरंज को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभिभावकों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आया है और वे शतरंज को बच्चों के मानसिक विकास के साथ-साथ संभावित करियर विकल्प के रूप में देखने लगे हैं।

शतरंज खिलाड़ियों, निर्णायकों (आर्बिटर) की बढ़ती संख्या और प्रतियोगिताओं की निरंतरता राज्य के लिए शुभ संकेत है। यह स्पष्ट करता है कि छत्तीसगढ़ शतरंज के क्षेत्र में अपनी सशक्त और स्थायी पहचान स्थापित कर रहा है। आने वाले वर्षों में प्रदेश से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के और भी खिलाड़ी उभरने की पूरी संभावना है। छत्तीसगढ़ में शतरंज का बढ़ता वर्चस्व इस बात का प्रमाण है कि राज्य बौद्धिक खेलों के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
प्रदेश शतरंज संघ का गठन और राष्ट्रीय मान्यता
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के नए राज्य के रूप में गठन के साथ ही खेलों के संगठन और विकास की दिशा में नई संभावनाएँ खुलीं। शतरंज को संगठित आधार देने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी शतरंज के पुरोधा विनोद राठी ने संभाली। शुरुआती दौर में डी.सी. लूनिया ने प्रदेश शतरंज संघ के अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व किया।
संघ के गठन के साथ ही अखिल भारतीय शतरंज महासंघ से संबद्धता प्राप्त हुई, जिससे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय शतरंज मंच पर विधिवत पहचान मिली। इसके साथ ही प्रतियोगिताओं का आयोजन, खिलाड़ियों का पंजीयन, प्रशिक्षण शिविर और राष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता का मार्ग प्रशस्त हुआ।
छत्तीसगढ़ के पहले राज्य चैंपियन – रविकुमार
छत्तीसगढ़ की प्रथम राज्य सीनियर शतरंज प्रतियोगिता 10 से 15 जून 2001 तक दुर्ग में आयोजित की गई, जिसमें 73 खिलाड़ियों ने भाग लिया। रायपुर के रविकुमार ने 7.5 अंकों के साथ प्रतियोगिता जीतकर छत्तीसगढ़ के पहले राज्य चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।
इस प्रतियोगिता में योगेश गोरे, संतोष कौशिक, गुलशन बग्गा, पी.एल. शास्त्री, आर.पी. सिंह, राजेश अग्रवाल और रणवीर भट्टी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की भागीदारी रही। 15 वर्षीय रणवीर भट्टी का सीनियर टीम में चयन उस समय विशेष चर्चा का विषय बना।
राष्ट्रीय सब-जूनियर चैंपियनशिप: एक ऐतिहासिक उपलब्धि
राजधानी रायपुर में आयोजित 27वीं राष्ट्रीय सब-जूनियर ओपन और 18वीं राष्ट्रीय सब-जूनियर गर्ल्स चेस चैंपियनशिप छत्तीसगढ़ शतरंज के लिए मील का पत्थर साबित हुई। देशभर से आए सैकड़ों प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की सहभागिता ने रायपुर को राष्ट्रीय शतरंज का केंद्र बना दिया।
इस आयोजन की सफलता ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शतरंज आयोजनों की मेज़बानी करने में पूरी तरह सक्षम है। इसी का परिणाम रहा कि आगे चलकर “छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर चेस टूर्नामेंट” जैसे प्रतिष्ठित आयोजन संभव हो सके।
कियान अग्रवाल: 8 वर्ष की उम्र में इतिहास रचने वाला सितारा
छत्तीसगढ़ के युवा शतरंज खिलाड़ी कियान अग्रवाल ने महज 8 वर्ष की उम्र में कैंडिडेट मास्टर का खिताब हासिल कर इतिहास रच दिया। वर्ष 2017 में रोमानिया में आयोजित वर्ल्ड स्कूल चेस चैंपियनशिप में उन्होंने 12वां स्थान प्राप्त किया। इसके बाद 2018 में चीन में आयोजित एशियन स्कूल चेस चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर वे छत्तीसगढ़ से यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी बने।
छत्तीसगढ़ शतरंज की वर्तमान ताकत
आज छत्तीसगढ़ में
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250+ स्टैंडर्ड रेटेड खिलाड़ी
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200+ रैपिड रेटेड खिलाड़ी
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100+ ब्लिट्ज रेटेड खिलाड़ी
सक्रिय रूप से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
महिला शतरंज में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 100 से अधिक महिला खिलाड़ियों में से 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग प्राप्त कर चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़
सितंबर 2022 में लगभग दो दशकों बाद सीएम ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर चेस टूर्नामेंट का आयोजन छत्तीसगढ़ में हुआ। 14 देशों के 128 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और देशभर के 348 खिलाड़ियों की सहभागिता ने राज्य को वैश्विक शतरंज मानचित्र पर स्थापित कर दिया।
आगे की राह
आगामी 16 से 22 मार्च 2026 तक रायपुर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय शतरंज टीम चैंपियनशिप एक बार फिर छत्तीसगढ़ को शतरंज के केंद्र में लाने जा रही है। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के लिए मंच बनेगा, बल्कि राज्य में शतरंज के भविष्य को नई दिशा देगा।
