बच्चों की मासूम बातों से आनंदित हो उठते हैं मुख्यमंत्री योगी , सख्त प्रशासक की छवि के पीछे झलकता है सीएम का कोमल हृदय और बालप्रेम
Behind the image of a strict administrator, the CM's tender heart and love for children are evident.
लखनऊ, 19 जनवरी। अनुशासनप्रिय, सख्त प्रशासक और अपराध-अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों के बीच पहुंचते ही एक अलग ही रूप में नजर आते हैं। उनकी स्नेहिल मुस्कान और आत्मीय व्यवहार बच्चों को सहज कर देता है। बच्चे बिना संकोच अपनी बातें और इच्छाएं मुख्यमंत्री के सामने रखते हैं और उनसे घुल-मिल जाते हैं। यह दृश्य सीएम योगी के कोमल हृदय, बालप्रेम और सर्वसुलभ व्यक्तित्व का सजीव प्रमाण है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों और जरूरतमंदों से जुड़ाव उनकी सख्त छवि के मानवीय पक्ष को उजागर करता है। यही कारण है कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में समाज का हर वर्ग उनके प्रति गहरा भरोसा महसूस करता है। यह भावनात्मक रिश्ता उन्हें समाज के हर तबके से जोड़ता है।
बच्चों से संवाद के कई भावुक क्षण
‘जनता दर्शन’ में सोमवार को आई नन्ही बच्ची से संवाद हो या मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में बच्चों से हुई बातचीत—मुख्यमंत्री और बच्चों के बीच ऐसे कई आत्मीय दृश्य सामने आए हैं। गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछकर उसका जवाब सुनकर सीएम योगी का ठहाका लगाना, मासूमियत से भरा वह क्षण लोगों के दिलों को छू गया।
जहां एक ओर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बुलडोजर एक्शन और प्रशासनिक दृढ़ता सीएम योगी की पहचान है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी संवेदनशीलता उन्हें एक दयालु संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है।
24 घंटे में मिला न्याय, बनी मिसाल
बीते 31 दिसंबर को एक मेजर की बेटी अंजना भट्ट अपनी समस्या लेकर मुख्यमंत्री से मिली थी। सीएम योगी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 24 घंटे के भीतर—यानी नए साल के पहले ही दिन—न सिर्फ उसका मकान कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी भी सुनिश्चित कराई। यह उदाहरण दर्शाता है कि मुख्यमंत्री बच्चों और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में कोई देरी नहीं करते।
मूक-बधिर खुशी को मिला संबल
कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता का मामला भी लोगों को भावुक कर गया। मुख्यमंत्री से मिलने की जिद में पैदल लखनऊ पहुंचने वाली खुशी को सीएम योगी ने न सिर्फ सम्मानपूर्वक बुलाया, बल्कि उसके बनाए चित्र स्वीकार किए और उसके सुरक्षित व शिक्षित भविष्य का भरोसा दिलाया। यह अनुभव खुशी और उसके परिवार के लिए जीवन भर की अमूल्य धरोहर बन गया।
स्कूल में प्रवेश बना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता
‘जनता दर्शन’ के माध्यम से
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कानपुर की मायरा,
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गोरखपुर की पंखुड़ी,
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मुरादाबाद की वाची
का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। मायरा के डॉक्टर बनने के सपने पर सीएम ने तत्काल एडमिशन के निर्देश दिए। वाची और पंखुड़ी की शिक्षा भी बिना विलंब शुरू कराई गई, साथ ही पंखुड़ी की फीस माफ कर उसे दोबारा स्कूल भेजा गया।
बूढ़ी मां का दर्द सुन द्रवित हुए सीएम
29 सितंबर के जनता दर्शन में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे की पीड़ा लेकर पहुंचीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका दर्द सुनकर द्रवित हो गए और तुरंत बेटे को एंबुलेंस से कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर बेहतर इलाज शुरू कराया।
दिव्यांगों को मिली ‘रोशनी’
17 अप्रैल के जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने चंदौली से आए दो दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रॉनिक सेंसरयुक्त स्टिक प्रदान की और स्वयं उसका उपयोग समझाया। वहीं एक अन्य दिव्यांग की पेंशन से जुड़ी समस्या का तत्काल समाधान कर केवाईसी कराते हुए पेंशन योजना का लाभ सुनिश्चित कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ये सभी उदाहरण यह दर्शाते हैं कि वे केवल एक सख्त प्रशासक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, करुणामय और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाले नेतृत्वकर्ता भी हैं। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर उनकी प्रतिबद्धता ही उनके सुशासन की असली पहचान है।
