बमाया एवं कोटवाली नदी पुनर्जीवन’ पुस्तक का प्रकाशन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की सराहना
लखनऊ, 1 सितंबर 2026। जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और भारतीय ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखते हुए ‘बमाया एवं कोटवाली नदी पुनर्जीवन’ नामक पुस्तक का प्रकाशन नाटल्स पब्लिकेशन, नई दिल्ली द्वारा किया गया है। पुस्तक में वर्ष 2026 के दौरान बमाया एवं कोटवाली नदियों के पुनर्जीवन से जुड़े अनुभवों और प्रयासों को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक के लेखक जलपुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह, तरुण भारत संघ, राजस्थान हैं, जबकि इसका संपादन पर्यावरणविद् प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह, महानिदेशक (तकनीकी), स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एसएमएस), लखनऊ ने किया है।
पुस्तक में नदी पुनर्जीवन के साथ भारतीय वैदिक ज्ञान, जल विज्ञान, भूजल पुनर्भरण, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन तथा जनभागीदारी से जुड़े वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं को विस्तार से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य नदी संरक्षण के सफल अनुभवों को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित करने के साथ उन्हें व्यापक स्तर पर साझा करना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पहल की सराहना
पुस्तक के प्रकाशन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नदी संरक्षण को भारतीय परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने बमाया एवं कोटवाली नदियों के पुनर्जीवन के प्रयासों को जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, पर्यावरणीय संतुलन और सामुदायिक सहभागिता की दिशा में प्रेरक पहल बताया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं तथा जल और पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले विशेषज्ञों एवं संस्थानों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री साबित होगी।
भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का प्रयास
एसएमएस के सचिव एवं सीईओ शरद सिंह ने पुस्तक के प्रकाशन को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने नदी पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों के लिए डॉ. राजेन्द्र सिंह और दोनों अनुसंधान केंद्रों की टीम के प्रयासों की सराहना की।
पुस्तक के संपादक प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह ने कहा कि इस प्रकाशन का उद्देश्य केवल बमाया और कोटवाली नदियों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया को दर्ज करना नहीं है, बल्कि जल संरक्षण को जन-अभियान बनाने का संदेश देना भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय जल-दृष्टि को आधुनिक विज्ञान, तकनीकी ज्ञान और जनभागीदारी से जोड़कर जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
उन्होंने इस कार्य में सहयोग के लिए जलपुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह, तरुण भारत संघ तथा एसएमएस के वैदिक विज्ञान केंद्र और सी.वी. रमन अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
एसएमएस परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पुस्तक और इससे जुड़े प्रयासों की सराहना करने तथा शुभकामनाएं देने के लिए आभार व्यक्त किया। संस्थान ने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक नदी संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में नई सोच तथा सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
