वेदांत के नंद घर में माताओं की भागीदारी से मजबूत हो रहा बाल पोषण, अब तक 15 लाख भोजन उपलब्ध
माताओं को बनाया पोषण अभियान का सक्रिय भागीदार
नंद घर के पोषण कार्यक्रम की प्रमुख पहल ‘मातृ भोजन तैयारी कार्यक्रम’ है। इसके तहत स्थानीय माताओं को बच्चों के लिए ताजा, स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार करने में सीधे शामिल किया जाता है। इससे माताओं को न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में योगदान देने का अवसर मिलता है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय का साधन भी उपलब्ध होता है।
कार्यक्रम के तहत अब तक करीब 2 लाख माताओं को जोड़ा जा चुका है और उनके सहयोग से लगभग 15 लाख भोजन उपलब्ध कराए गए हैं। माताओं को उनके योगदान के पारिश्रमिक के तौर पर यूपीआई के माध्यम से करीब 60 लाख रुपये वितरित किए गए हैं।
नंद घर के सीईओ शशि अरोड़ा ने कहा कि पोषण को स्थायी बनाने के लिए समुदायों को इसमें सक्रिय रूप से शामिल करना जरूरी है। उनके अनुसार, माताओं को भोजन तैयार करने की प्रक्रिया से जोड़ने के साथ पोषण जागरूकता, वैज्ञानिक हस्तक्षेप और स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ लाने से परिवारों में ऐसी स्वस्थ आदतें विकसित की जा सकती हैं, जो नंद घर से बाहर भी जारी रहें।
उन्होंने कहा कि यह पहल वेदांत समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के उस व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी है, जिसमें समुदायों को सशक्त बनाने और देश की अगली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए निवेश करने पर जोर दिया गया है।
18 राज्यों में 15 हजार से अधिक नंद घर
वर्तमान में नंद घर देश के 18 राज्यों में 15,000 से अधिक केंद्रों के माध्यम से लगभग 5 लाख बच्चों और 4 लाख महिलाओं तक पहुंच बना रहा है। इन केंद्रों पर पोषण, स्वास्थ्य सेवा, प्रारंभिक बाल विकास और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
नंद घर की ‘दीदियां’, यानी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्थानीय समुदाय की माताओं की पहचान कर उन्हें भोजन तैयारी कार्यक्रम से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माताओं की भागीदारी मासिक रोस्टर के आधार पर तय की जाती है। इस मॉडल के जरिए घर में तैयार होने वाले भोजन जैसी देखभाल, स्वच्छता और जिम्मेदारी की भावना को नंद घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
भोजन की गुणवत्ता और बच्चों की सक्रियता पर जोर
माताओं की प्रत्यक्ष भागीदारी से भोजन की ताजगी, स्वच्छता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वहीं, घर के बने भोजन से जुड़ा अपनापन बच्चों के लिए भोजन के समय को अधिक सहज और आनंददायक बनाने में मदद करता है।
इस प्रक्रिया से माताओं को बच्चों के खान-पान को लेकर बेहतर समझ और नियंत्रण भी मिलता है। इससे स्वस्थ भोजन की आदतों को परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 97 प्रतिशत बच्चों को भोजन मिल रहा है, जबकि 97 प्रतिशत नंद घरों ने बच्चों की भूख और उपस्थिति में सुधार दर्ज किया है। इसके अलावा, 99 प्रतिशत बच्चे भोजन के बाद सक्रिय और खुश दिखाई देते हैं और 89 प्रतिशत बच्चे अपना पूरा भोजन समाप्त करते हैं।
स्थानीय खाद्य सामग्री से तैयार हो रहा पौष्टिक आहार
नंद घर के पोषण कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाजरा न्यूट्रीबार, शिशु संजीवनी (एनडीडीबी द्वारा तैयार फोर्टिफाइड हलवा) और ताजे फलों के पूरक आहार जैसे विकल्प शामिल किए गए हैं।
इसके साथ ही नंद घर लक्षित और साक्ष्य-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से अपने पोषण मॉडल को और मजबूत कर रहा है। राजस्थान में चल रहा प्रोजेक्ट बालवर्धन बच्चों और माताओं के लिए पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों को एक साथ जोड़ता है।
पोषण के साथ स्वास्थ्य और विकास पर भी ध्यान
नंद घर का मॉडल केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसमें पूरक पोषण, बच्चों के विकास की निगरानी, मातृ भागीदारी, पोषण संबंधी जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करने का प्रयास किया गया है।नंद घर का मानना है कि पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रारंभिक बाल विकास एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसलिए माताओं और स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ परिवारों में ऐसी जागरूकता और आदतें विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।
