नवाचारी मंच पर बाल वैज्ञानिकों ने दिखाए क्रियाकारी मॉडल, स्मार्ट डस्टबिन ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में अधिकांश मॉडल दो या तीन विद्यार्थियों की टीम ने तैयार किए थे। कई विद्यार्थियों ने अपने नवाचार को डिजिटल तकनीक के माध्यम से भी प्रस्तुत किया। बच्चों ने दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक के प्रयोग से तैयार किए गए अपने-अपने आइडिया को मॉडल का रूप देकर प्रदर्शित किया।
इसी क्रम में बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज के छात्र शुभ तिवारी और हर्षित ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत और स्वच्छ भारत के विजन को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट डस्टबिन का मॉडल तैयार किया। इस मॉडल में सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। डस्टबिन के सामने कचरा ले जाने पर सेंसर सक्रिय होकर उसका ढक्कन स्वतः खोल देता है और कुछ समय बाद ढक्कन अपने आप बंद हो जाता है। इससे कचरे के सीधे संपर्क में आने की संभावना कम होगी और संक्रमण फैलने का खतरा भी घटेगा।
छात्रों ने अपने मॉडल में कचरे से विद्युत ऊर्जा तैयार करने की अवधारणा को भी शामिल किया है। उनका मानना है कि इस तकनीक के जरिए कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के साथ-साथ स्वच्छता और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
छात्रों ने बताया कि स्मार्ट डस्टबिन का यह विचार उन्हें उनके शिक्षक हरिश्चंद्र सिंह चौहान से मिला। शिक्षक के मार्गदर्शन में दोनों विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना और तकनीकी समझ को मॉडल के रूप में विकसित किया।
प्रदर्शनी के दौरान ज्यूरी के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के मॉडल का निरीक्षण किया और स्मार्ट डस्टबिन की अवधारणा की सराहना की। उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शुभ तिवारी और हर्षित को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया, जबकि उनके शिक्षक हरिश्चंद्र सिंह चौहान को भी उपहार देकर सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता को सामने लाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
