Chitrakoot News: चित्रकूट में 'अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम धाम' की स्थापना; संतों और किन्नर समाज की मौजूदगी में पूजित हुईं श्रीराम की चांदी की पादुकाएं
चित्रकूटधाम/लखनऊ डेस्क: पवित्र पावन कामदगिरि चित्रकूट धाम इन दिनों 'बंधुत्वेश्वरम धाम' के जयकारों से गुंजायमान है। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर चित्रकूट के कामदगिरि धाम में 'अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम धाम' के निर्माण की नींव रखते हुए प्रभु श्री राम की पावन चांदी की पादुकाओं और भरत जी के त्याग के प्रतीक 'त्याग के दीपक' की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य अतिथि के रूप में निर्मोही अखाड़े के पूज्य दिव्य जीवन दास महाराज जी और अध्यक्षता कर रहे भरत मिलाप मंदिर के महंत राम मनोहर दास जी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
संतों और किन्नर समाज का मिला अखंड आशीर्वाद
सनातन परंपरा के इस अनूठे समागम में अंतरराष्ट्रीय परिषद की अनंत विभूषित महामंडलेश्वर और जूना अखाड़े की वरिष्ठ संत पुण्य गिरी जी महाराज (गुजरात) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। 'अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम धाम' निर्माण के संस्थापक व पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के मानस पुत्र संजीव द्विवेदी ने संतों और किन्नर समाज की गरिमामयी उपस्थिति में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के कल्याणार्थ 'भरत जी के त्याग का दीप' प्रज्वलित किया।
इस अवसर पर "दक्षिणे रामेश्वरम यस्य उत्तरे बंधुत्वेश्वरम" के गगनभेदी नारे गूंजे, जो नर, वानर और किन्नर समाज की साझी सनातन संस्कृति को प्रदर्शित कर रहे थे।
उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ेगा 'बंधुत्व का संदेश'
गुजरात से पधारीं महामंडलेश्वर पुण्य गिरी जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि जिस प्रकार त्रेतायुग में सेतुबंध रामेश्वरम का निर्माण संतों, नर और वानरों के सहयोग से हुआ था, ठीक उसी तरह कलयुग में संतों और किन्नर समाज के सामूहिक संकल्प से कामदगिरि चित्रकूट की धरती पर 'अटल विश्व बंधुत्वेश्वरम धाम' का भव्य निर्माण होगा। यह पावन धाम उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ेगा और मर्यादा पुरुषोत्तम राम व भाई भरत के अटूट प्रेम और त्याग की गाथा को वैश्विक पटल पर ले जाएगा।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने त्रेतायुग में संतों की उपस्थिति में किन्नर समाज को चित्रकूट की इसी पावन धरती पर आशीर्वाद दिया था, जहाँ दो भाइयों (राम-भरत) का ऐतिहासिक मिलन हुआ था।
संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) भेजी जाएगी 'बंधुत्वेश्वरम' की प्रतिमा
पादुका प्राण-प्रतिष्ठा का यह संपूर्ण अनुष्ठान अयोध्या से पधारे प्रकांड विद्वान पंडित तरन तारण जी महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष आर.एल. पाण्डेय, ट्रस्ट के पदाधिकारी मदन मोहन शर्मा, सुनील मिश्रा, आलोक सिंह, और गुजरात से आईं प्रेमा बुआ व किंजल किन्नर ने पूरे मनोयोग से व्यवस्थाएं संभालीं।
संस्थापक संजीव द्विवेदी ने अपने आध्यात्मिक विचार साझा करते हुए कहा उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के रामेश्वरम तक भरत जी के त्याग के दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही, संपूर्ण विश्व में शांति और भाईचारे का संदेश देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में राम-भरत मिलाप और 'बंधुत्वेश्वरम धाम' की एक भव्य मूर्ति व पावन दीपक भेजा जाएगा।"
'पुरुषोत्तम' बनने का मिला अखंड आशीर्वाद
धार्मिक अनुष्ठान के समापन पर उपस्थित सभी पूज्य संतों को अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। पुरुषोत्तम मास के इस पावन संयोग पर चित्रकूट के महान संतों ने पूर्व प्रधानमंत्री के मानस पुत्र संजीव द्विवेदी को 'पुरुषोत्तम' बनने और जीवन के हर क्षेत्र में अखंड विजय प्राप्त करने का मंगलमयी आशीर्वाद प्रदान किया।
