CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग, SEM कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
दिल्ली पुलिस ने मांगी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत, जमानत याचिका पर सुनवाई के बीच हाई कोर्ट की टिप्पणियां भी चर्चा में
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत याचिका पर बुधवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की। सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
इससे पहले सौरव दास और आशुतोष रांका ने मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए रिवीजन याचिका का विकल्प उपलब्ध है। इसके बाद दोनों ने हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली थी।
हाई कोर्ट ने उठाए थे कई सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका से कई सवाल किए थे। अदालत ने पूछा था कि जब मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट कोर्ट में हो रही थी, तो वे सीधे हाई कोर्ट क्यों पहुंचे।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने पूछा था कि यदि प्रदर्शन पर रोक थी, तो दोनों वहां क्यों गए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बॉन्ड भरने के बाद जंतर-मंतर जाने और निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करने के मामले में उनकी जिम्मेदारी क्या बनती है।
अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि यदि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े जाते और स्थिति हिंसक हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति लेने के विकल्प पर भी सवाल किया गया।
सुनवाई के दौरान दोनों की उम्र को लेकर भी टिप्पणी की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने कहा था कि सौरव दास और आशुतोष रांका को जेन-जी (Gen Z) नहीं कहा जा सकता।
जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस से जुड़े मामलों की जांच
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं से जुड़े मामलों में जांच का दायरा भी बढ़ रहा है। कनॉट प्लेस से संबंधित एक मामला पहले ही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपा जा चुका है। इसके बाद जंतर-मंतर से जुड़े दूसरे मामले को भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल, मंदिर मार्ग SEM कोर्ट में न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग पर फैसला सुरक्षित है। अदालत के आदेश और जमानत याचिका पर आगे की कार्यवाही को लेकर स्थिति उसके निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।
