गोरखपुर में बोले सीएम योगी PM विश्वकर्मा योजना से हस्तशिल्पियों और कारीगरों को मिला नया मंच
गोरखपुर, 17 सितंबर। भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती के अवसर पर गोरखपुर में आयोजित श्री श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हस्तशिल्पियों और पारंपरिक कारीगरों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नए भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के हस्तशिल्पियों और कारीगरों को ‘पीएम विश्वकर्मा’ के रूप में एक नया मंच उपलब्ध कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि जो देश अपने हस्तशिल्पियों, कारीगरों और आर्टिजन्स का सम्मान करता है, वही प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ता है। इसी सोच के तहत पारंपरिक हुनर से जुड़े लोगों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पारंपरिक कारीगरी को मिला सरकारी सहयोग
सीएम योगी ने कहा कि ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को सहायता दी जा रही है। इनमें राजमिस्त्री, बढ़ई, हलवाई, सुनार सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कारीगर शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी अनेक पारंपरिक कारीगरी रही हैं, जो लंबे समय तक देश और समाज के स्वावलंबन का आधार बनीं। इन हुनरमंद लोगों की कला और कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते रहे हैं, लेकिन आजादी के बाद लंबे समय तक इन पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों की अपेक्षित स्तर पर चिंता नहीं की गई।
टूलकिट, प्रशिक्षण और ऋण की सुविधा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने इन कारीगरों और हस्तशिल्पियों की जरूरतों को गंभीरता से समझते हुए उनके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। उन्हें टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा अपना काम आगे बढ़ाने के लिए बैंकों के माध्यम से आसान और सस्ता ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को मजबूत करना, कारीगरों को स्वावलंबी बनाना और उनके कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ना है। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को सम्मान, प्रशिक्षण, उपकरण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इससे सदियों पुराने हुनर को नई पहचान मिलने के साथ ही कारीगरों के आत्मनिर्भर बनने के रास्ते भी मजबूत हो रहे हैं।
