मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ और आईएमए अयोध्या ने आयोजित किया सीएमई कार्यक्रम

Medanta Hospital, Lucknow and IMA Ayodhya organized CME program
 
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अयोध्या/लखनऊ डेस्क (आर एल पाण्डेय)। स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें उपचार में होने वाली हर मिनट की देरी मरीज के मस्तिष्क की लगभग 19 लाख ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में समय पर पहचान और तत्काल उपचार न केवल मरीज की जान बचा सकता है, बल्कि उसे स्थायी विकलांगता से भी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जानकारी मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) अयोध्या द्वारा आयोजित कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साझा की।

मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रतीश जुयाल ने कहा कि भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं।

यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रोहित कपूर ने बताया कि भारत में लगभग 10 से 12 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में कभी न कभी किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है और यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है।

कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से अवगत कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को और सशक्त बनाना था।

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