संविधान ने महिलाओं को दी गुलामी से आजादी और सम्मान: लखनऊ में बोले पूर्व CM भूपेश बघेल
महिलाओं को मिले अधिकारों की क्रांति: भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को समता, समानता और मानवता का जो अधिकार दिया है, वह ऐतिहासिक है।
भूपेश बघेल के संबोधन के मुख्य बिंदु:
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ऐतिहासिक बदलाव: आजादी और संविधान से पूर्व महिलाएं सामाजिक बेड़ियों में जकड़ी थीं। युवा विधवाओं का सिर मुंडवाना और उन्हें खुशियों से वंचित रखना एक सामान्य बुराई थी।
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फुले का संघर्ष: महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज की इन कुरीतियों को पहचानकर सबसे पहले अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित किया।
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शिक्षा की शुरुआत: ज्योतिबा फुले हर दोपहर अपनी पत्नी के साथ बैठकर उन्हें पढ़ाते थे और बाद में उन्हें औपचारिक प्रशिक्षण के लिए स्कूल भेजा। इसी संघर्ष का परिणाम था कि 1848 में पुणे में देश की पहली महिला पाठशाला खुली।
सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत थे ज्योतिबा फुले: राजेंद्र पाल गौतम
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने उस दौर में दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए आवाज उठाई जब उन पर अत्याचार चरम पर थे।
राजेंद्र पाल गौतम की प्रमुख बातें:
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मिशन: स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार दिलाना, बाल विवाह का कड़ा विरोध और विधवा विवाह का समर्थन करना उनका मूल उद्देश्य था।
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अंधश्रद्धा से मुक्ति: फुले समाज को कुप्रथाओं और अंधविश्वास के जाल से मुक्त करना चाहते थे।
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गुरु की उपाधि: बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर भी महात्मा फुले को अपना गुरु मानते थे। सावित्रीबाई फुले का भारत की प्रथम महिला अध्यापिका बनना इस क्रांति का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मंच पर मौजूद रहे दिग्गज नेता
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कांग्रेस के कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं ने शिरकत की, जिनमें प्रमुख रहे:
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पोनम प्रभाकर: कैबिनेट मंत्री, तेलंगाना सरकार।
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अविनाश पांडे: राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी।
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तनुज पुनिया: सांसद एवं अध्यक्ष, अनुसूचित जाति विभाग (यूपी)।
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आराधना मिश्रा 'मोना': नेता, कांग्रेस विधायक दल (यूपी)।
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अजय कुमार लल्लू: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।
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धीरज गुर्जर व प्रदीप नरवाल: राष्ट्रीय सचिव।
इस अवसर पर प्रदेश भर से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने सामाजिक समानता और जाति जनगणना के संकल्प को दोहराया।
