130 साल तक गांव का सदस्य रहा मगरमच्छ 'गंगाराम', अब NCERT की किताबों में पढ़ाई जाएगी उसकी कहानी
ग्रामीण बताते हैं कि महिलाएं उसी तालाब से पानी भरती थीं, किसान अपने मवेशियों को वहीं पानी पिलाते थे और बच्चे भी उसके आसपास खेलते थे। इंसानों और मगरमच्छ के बीच बना यह भरोसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पूरे क्षेत्र में मिसाल माना जाता था। साल 2019 में गंगाराम की मौत के बाद पूरा गांव शोक में डूब गया। ग्रामीणों ने पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। श्रद्धांजलि स्वरूप गांव के किसी भी घर में उस दिन चूल्हा नहीं जला। गंगाराम की अंतिम विदाई की तस्वीरें और यह अनोखी घटना देशभर में चर्चा का विषय बनी थीं।
अब गंगाराम की प्रेरणादायक कहानी NCERT की पुस्तक में भी शामिल की गई है। 'My India! – A Bond Between Humans and Animals' शीर्षक के अंतर्गत इसे इंसानों और वन्यजीवों के बीच विश्वास, संवेदनशीलता, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति सम्मान के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा।
गंगाराम की कहानी यह संदेश देती है कि यदि मनुष्य और वन्यजीव एक-दूसरे के प्राकृतिक आवास और अस्तित्व का सम्मान करें, तो दोनों के बीच विश्वास और सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व संभव है।
