डाबर च्यवनप्राश की कार्यशाला में बच्चों को मिली सेहतमंद रहने की सीख
लखनऊ। मानसून का मौसम जहाँ गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण खासकर बच्चे सर्दी-जुकाम, मलेरिया, डेंगू, टायफाइड और निमोनिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए डाबर च्यवनप्राश ने मंगलवार को बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल, पल्टन छावनी शाखा (सीतापुर रोड योजना, लखनऊ) में एक कार्यशाला का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में ढाई सौ से अधिक छात्रों को मानसून में सेहत का ध्यान रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीके बताए गए। कार्यशाला में आयुर्वेदाचार्य डॉ. वी. अरोरा, डाबर इंडिया लिमिटेड के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस मैनेजर दिनेश कुमार, स्कूल प्रबंध निदेशक एच.एन. जायसवाल, प्रधानाचार्या रश्मि शुक्ला और समाजसेवी पंकज कुमार भी उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों की राय
कार्यशाला में डॉ. अरोरा ने बताया कि मानसून में उमस और नमी से कई प्रकार के संक्रमण तेजी से फैलते हैं। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद पर आधारित च्यवनप्राश शरीर को ऊर्जा और सुरक्षा देने का प्राकृतिक उपाय है।
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन दो चम्मच च्यवनप्राश का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और मौसमी संक्रमणों से बचाव में मदद मिलती है। च्यवनप्राश आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में भी सहायक माना गया है।
डाबर की पहल
डाबर इंडिया लिमिटेड के हेल्थ सप्लीमेंट्स मार्केटिंग हेड अमित गर्ग ने कहा कि डाबर सदियों पुराने आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से बने उत्पादों के जरिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने बताया कि डाबर च्यवनप्राश में आंवला मुख्य घटक है, जो प्राकृतिक रूप से इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक है। इसके अलावा गुदुची, पिप्पली, कांटाकरी, काकदासिंगी, वासा, शालपर्णी जैसी जड़ी-बूटियाँ भी इसमें सम्मिलित हैं, जो श्वसन रोगों और मौसमी संक्रमण से बचाव करती हैं।
