डाबर हाजमोला का ‘मस्ती की पाठशाला’ अभियान, बच्चों को खेल-कूद और फिटनेस के लिए करेगा प्रेरित
लखनऊ डेस्क, आर एल पाण्डेय। बच्चों को खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से डाबर इंडिया लिमिटेड ने अपने नए अभियान ‘हाजमोला मस्ती की पाठशाला’ की शुरुआत की है। अभियान के तहत बच्चों को मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक रूप से सक्रिय रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इसी क्रम में सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, जानकीपुरम में ‘हाजमोला मस्ती की पाठशाला’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्रीआयु ज्वाइंट केयर के चिकित्सक डॉ. राजन वर्मा, डाबर इंडिया लिमिटेड के मैनेजर कॉरपोरेट कम्युनिकेशन दिनेश कुमार और विद्यालय की प्रधानाचार्या सुधा तिवारी मौजूद रहीं।
20 शहरों के 550 स्कूलों में चलेगा अभियान
डाबर के अनुसार ‘मस्ती की पाठशाला’ अभियान उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 20 प्रमुख शहरों के 550 स्कूलों में संचालित किया जाएगा। इसके माध्यम से 2.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
अभियान में बच्चों के लिए विभिन्न मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विशेष रूप से फन गेम्स के जरिए विद्यार्थियों को सुस्ती और निष्क्रियता से बाहर निकलकर नियमित रूप से खेल-कूद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके अलावा स्वास्थ्य एवं फिटनेस विशेषज्ञों के सत्र भी आयोजित होंगे। इन सत्रों में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास में नियमित शारीरिक गतिविधियों की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी। एकाग्रता, मेटाबॉलिज्म और पाचन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
मस्ती और फिटनेस को जोड़ने की पहल
डाबर इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर मार्केटिंग श्रीराम पद्मनाभन ने कहा कि ‘मस्ती की पाठशाला’ के माध्यम से मनोरंजन और फिटनेस को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार आज बच्चे घर के अंदर और स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं, ऐसे में उन्हें खेल-कूद की ओर प्रेरित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अभियान के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचकर ऐसी पीढ़ी को प्रोत्साहित करने का प्रयास है, जो अपने दैनिक जीवन में मनोरंजन के साथ शारीरिक गतिविधियों और सक्रिय जीवनशैली के महत्व को भी समझे।
खेल-कूद से मानसिक विकास को भी बढ़ावा
कार्यक्रम में डॉ. राजन वर्मा ने कहा कि शारीरिक गतिविधियां बच्चों के केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। नियमित खेल-कूद से बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त बेहतर करने में मदद मिल सकती है तथा उन्हें पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में भी सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बच्चों का स्क्रीन और गैजेट्स पर बढ़ता समय चिंता का विषय है। ऐसे में खेल-कूद उन्हें सक्रिय रखने के साथ तनाव कम करने और मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने में मदद कर सकता है।
‘मस्ती की पाठशाला’ को बताया समग्र स्वास्थ्य की पहल
डाबर इंडिया लिमिटेड के कैटेगरी हेड-हेल्थकेयर ओटीसी प्रबल वालिया ने कहा कि ‘हाजमोला मस्ती की पाठशाला’ को केवल ब्रांड अभियान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और विकास को प्रोत्साहित करने की पहल है।
उन्होंने कहा कि अभियान में खेल-कूद को प्रमुखता देना इस सोच पर आधारित है कि नियमित शारीरिक गतिविधियां स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। डाबर का उद्देश्य बच्चों में ऐसी सकारात्मक आदतों को बढ़ावा देना है, जिससे खेल और फिटनेस उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन सकें।उन्होंने कहा कि युवाओं में कम उम्र से ही सक्रिय जीवनशैली के प्रति रुचि विकसित होने से वे स्वास्थ्य और फिटनेस के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
