मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लखनऊ में बच्चों के लिए समर्पित चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर शुरू

विकास, व्यवहार और न्यूरोलॉजी से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान, जांच और उपचार की सुविधा एक ही स्थान पर
 
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लखनऊ, 28 सितंबर 2026। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने बच्चों के विकास, व्यवहार और न्यूरोलॉजी से जुड़ी समस्याओं के लिए समर्पित चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर (CDC) की शुरुआत की है। सेंटर का उद्देश्य बच्चों में विकास संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार उपचार एवं थेरेपी उपलब्ध कराना है।

चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में बच्चों की जरूरत के अनुसार विभिन्न विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे। सेंटर का नेतृत्व डॉ. एम.यू. हसन, डायरेक्टर एवं एचओडी, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी; डॉ. अंकिता गर्ग, कंसल्टेंट, चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री और डॉ. देविना सिंह, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ करेंगी।

बच्चों में विकास संबंधी देरी को नजरअंदाज न करने की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार, 2 से 4 वर्ष की उम्र में बच्चे का देर से बोलना या भाषा सीखने में परेशानी होना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कुछ मामलों में इसके पीछे ऑटिज्म, सुनने से जुड़ी समस्या या विकास संबंधी अन्य कारण हो सकते हैं। ऐसे में बच्चे के विकास में देरी दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में 1 से 18 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल और उपचार किया जाएगा। यहां ऑटिज्म, एडीएचडी, बोलने और भाषा के विकास में देरी, चलने-फिरने या अन्य गतिविधियां सीखने में देरी, सीखने से जुड़ी समस्याएं, सेंसेरी प्रोसेसिंग संबंधी कठिनाइयां, सेरेब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम, बौद्धिक विकास से जुड़ी समस्याएं, सामाजिक एवं संचार संबंधी कठिनाइयां, मिर्गी और व्यवहार संबंधी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध होगी।

परिवार की भागीदारी को भी उपचार का हिस्सा बनाने पर जोर

सेंटर की शुरुआत पर डॉ. एम.यू. हसन, डायरेक्टर एवं एचओडी, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी, ने कहा, “मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ में हमारा मानना है कि हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है और समय पर सही मदद मिलने से बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण और लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव आ सकता है। हमारा इलाज केवल थेरेपी सेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारी अलग-अलग विशेषज्ञों की टीम माता-पिता के साथ मिलकर बच्चे की खूबियों, चुनौतियों और जरूरतों को समझती है और उसके लिए व्यक्तिगत आधार पर तैयार की गई थेरेपी योजना बनाती है, जिससे बच्चे को लगातार और बेहतर प्रगति करने में मदद मिल सके।”

डॉ. अंकिता गर्ग, कंसल्टेंट, चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री, ने कहा कि बच्चे के शुरुआती साल उसके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा, “अगर बच्चा देर से बोल रहा है, आंखों में देखकर बात नहीं करता, नाम पुकारने पर ध्यान नहीं देता या उसके व्यवहार और ध्यान को लेकर कोई परेशानी दिखती है तो माता-पिता को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच और मदद मिलने से बच्चे को काफी फायदा हो सकता है। एक ही सेंटर पर अलग-अलग विशेषज्ञों की मदद मिलने से परिवारों के लिए भी सही इलाज तक पहुंच आसान होगी।”

समय पर हस्तक्षेप से विकास में मिल सकती है मदद

बच्चे के विकास में किसी परेशानी की जितनी जल्दी पहचान हो, उतनी जल्दी आवश्यक सहायता शुरू की जा सकती है। खासकर शुरुआती उम्र में फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और व्यवहार संबंधी थेरेपी बच्चे को चलने-फिरने, बोलने, सीखने, सामाजिक संपर्क और रोजमर्रा के काम करने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों के विकास पर नियमित नजर रखना और जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

डॉ. देविना सिंह, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, ने कहा, “बच्चे का सही विकास उसके भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। विकास से जुड़ी परेशानी सिर्फ एक चीज तक सीमित नहीं होती। इसका असर बच्चे के बोलने, सीखने, चलने, व्यवहार और दूसरों के साथ बातचीत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बच्चे को एक से ज्यादा विशेषज्ञों की मदद की जरूरत हो सकती है।”

उन्होंने कहा कि न्यूरोलॉजी की जांच और उपचार के साथ स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, व्यवहार संबंधी थेरेपी, फिजियोथेरेपी और उचित पोषण पर ध्यान देने से बच्चे के विकास में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। अलग-अलग विशेषज्ञों का मिलकर काम करना बच्चे की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और उसके लिए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने में सहायक हो सकता है।

कई तरह की थेरेपी की सुविधा एक ही सेंटर पर

चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, एप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस (ABA) थेरेपी, स्पेशल एजुकेशन, बिहेवियरल थेरेपी, अर्ली इंटरवेंशन, फिजियोथेरेपी और सेंसेरी इंटीग्रेशन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक बच्चे के लिए उसकी जरूरत, विकास स्तर और लक्ष्यों के अनुसार उपचार एवं थेरेपी की योजना तैयार की जाएगी।

मैक्स अस्पताल, लखनऊ के अनुसार, सेंटर का उद्देश्य बच्चों को आवश्यक कौशल विकसित करने, रोजमर्रा के कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर बनने और उनकी क्षमताओं के अनुसार बेहतर विकास की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता देना है। इसके साथ ही माता-पिता को भी बच्चे की जरूरतों को समझने और उसकी बेहतर देखभाल के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा।

सेंटर का व्यापक उद्देश्य बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, संवेदनशील देखभाल, सुरक्षा, संरक्षण और शुरुआती उम्र में सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना है। इसके लिए विशेषज्ञों और परिवार के बीच समन्वय के साथ बच्चों की विकास संबंधी जरूरतों पर काम करने पर जोर दिया जाएगा।

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