पार्किंसन के मरीजों के लिए वरदान है 'डीप ब्रेन स्टिमुलेशन' (DBS): जब दवाएं बेअसर हों, तो सर्जरी दे सकती है नई जिंदगी

'Deep Brain Stimulation' (DBS) is a Boon for Parkinson's Patients: When Medications Become Ineffective, Surgery Can Offer a New Life.
 
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लखनऊ | 11 अप्रैल 2026: हाथों का कांपना, कदमों की धीमी रफ्तार और शरीर में जकड़न—ये लक्षण केवल बुढ़ापे की निशानी नहीं, बल्कि पार्किंसन (Parkinson's) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के संकेत हो सकते हैं। वर्ल्ड पार्किंसन डे के अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बीमारी के आधुनिक उपचार और समय पर पहचान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

क्यों होती है यह बीमारी?

मस्तिष्क में डोपामाइन नामक केमिकल बनाने वाली कोशिकाओं के धीरे-धीरे नष्ट होने से पार्किंसन रोग होता है। यह केमिकल शरीर की गतिविधियों (Movement) को नियंत्रित करता है। आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में दिखने वाली यह बीमारी अब कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर रही है।

प्रमुख लक्षण और सावधानियां

मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लक्षणों को पहचानना ही बचाव की पहली सीढ़ी है:

  • कंपकंपी: आराम की स्थिति में भी हाथों या उंगलियों का कांपना।

  • अकड़न: मांसपेशियों में खिंचाव और शरीर में भारीपन।

  • धीमापन: दैनिक कार्यों को करने की गति कम हो जाना।

  • असंतुलन: चलने में कठिनाई और गिरने का डर बना रहना।

डॉ. अनुप कुमार ठक्कर (डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी) ने चेतावनी दी है कि मरीज कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें, क्योंकि यह स्थिति को और अधिक खतरनाक बना सकता है।

जब दवाएं काम करना बंद कर दें: DBS तकनीक

पार्किंसन एक ऐसी बीमारी है जिसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन आधुनिक चिकित्सा से इसे नियंत्रित अवश्य किया जा सकता है। डॉ. कमलेश सिंह भैसौरा और डॉ. रवि शंकर (डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी) ने बताया कि जब लंबे समय तक दवा लेने के बाद उनका असर कम होने लगता है या साइड इफेक्ट्स बढ़ने लगते हैं, तब डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) सर्जरी का विकल्प अपनाया जाता है।

क्या है DBS सर्जरी?

  1. यह एक न्यूरो-सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें मस्तिष्क के विशिष्ट हिस्सों में इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं।

  2. ये इलेक्ट्रोड मस्तिष्क की असामान्य गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए विद्युत संकेत (Electrical Impulses) भेजते हैं।

  3. इससे कंपकंपी और अकड़न में भारी कमी आती है, जिससे दवाओं पर निर्भरता कम हो जाती है और मरीज की जीवनशैली में सुधार होता है।

जीवनशैली में बदलाव भी है जरूरी

डॉ. रतिश जुयाल ने बताया कि प्रदूषण और कीटनाशकों का बढ़ता प्रभाव भी इस बीमारी के कारकों में शामिल हो सकता है। दवाओं और सर्जरी के अलावा, मरीजों के लिए निम्नलिखित उपाय मददगार साबित होते हैं:

  • संतुलित और पौष्टिक आहार।

  • नियमित व्यायाम और योग।

  • मानसिक रूप से सक्रिय रहना (पहेलियां सुलझाना या पढ़ना)।

पार्किंसन से डरने की नहीं, बल्कि इसे समझने की जरूरत है। सही समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह और आधुनिक तकनीक जैसे DBS के माध्यम से मरीज एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।

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