देवरिया: बैंक कर्मचारी की सूझबूझ ने टाला बड़ा अनर्थ, बुजुर्ग के ₹20 लाख 'डिजिटल अरेस्ट' होने से बचाए

यह एक बेहद सराहनीय और जागरूकता फैलाने वाली खबर है। देवरिया के एचडीएफसी बैंक कर्मचारी की सतर्कता ने न केवल एक वरिष्ठ नागरिक की जीवनभर की पूंजी बचाई, बल्कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे गंभीर साइबर अपराध के प्रति समाज को सचेत भी किया है।
 
देवरिया: बैंक कर्मचारी की सूझबूझ ने टाला बड़ा अनर्थ, बुजुर्ग के ₹20 लाख 'डिजिटल अरेस्ट' होने से बचाए
देवरिया, 3 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के देवरिया में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के एक सतर्क कर्मचारी ने मिसाल पेश करते हुए एक वरिष्ठ नागरिक को ₹20 लाख की बड़ी ठगी का शिकार होने से बचा लिया। साइबर अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए पीड़ित को जाल में फंसाया था, लेकिन बैंक स्टाफ की मुस्तैदी ने धोखेबाजों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

क्या था पूरा मामला?

एक बुजुर्ग ग्राहक बेहद परेशान हालत में एचडीएफसी बैंक की देवरिया शाखा पहुंचे। उन्होंने अपनी ₹20 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को समय से पहले बंद करने का अनुरोध किया। ग्राहक के चेहरे पर घबराहट और हड़बड़ाहट देखकर बैंक कर्मचारी को संदेह हुआ। जब कर्मचारी ने प्यार से उनसे पूछताछ की, तो ग्राहक ने बताया कि वे एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉल पर हैं।

जांच करने पर पता चला कि साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें डराया था कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल 'मनी लॉन्ड्रिंग' (धन शोधन) के लिए किया जा रहा है। अपराधियों ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया था और बेगुनाही साबित करने के नाम पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे थे।

सतर्कता से बची जीवनभर की कमाई

बैंक कर्मचारी ने तुरंत स्थिति को भांप लिया और बुजुर्ग को समझाया कि यह एक 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' है। कर्मचारी ने न केवल उन्हें पैसे निकालने से रोका, बल्कि उनका फोन लेकर जालसाजों का नंबर ब्लॉक करने में भी मदद की।

सावधान: क्या है यह 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम?

डिजिटल अरेस्ट में अपराधी पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं। वे वर्दी पहनकर और पीछे एक नकली ऑफिस सेटअप दिखाकर पीड़ित को यकीन दिलाते हैं कि वे कानून के चंगुल में फंस चुके हैं। इसके बाद केस रफा-दफा करने या 'जांच शुल्क' के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।

खुद को ठगी से बचाने के लिए 5 जरूरी टिप्स

  1. वेरिफिकेशन करें: कोई भी असली सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।

  2. जल्दबाजी न करें: अपराधी हमेशा आपको डराकर तुरंत फैसला लेने का दबाव बनाएंगे। शांत रहें और परिवार को सूचित करें।

  3. गोपनीय जानकारी: अपना बैंक अकाउंट नंबर, ओटीपी, पिन या केवाईसी दस्तावेज कभी भी अनजान वीडियो कॉल पर साझा न करें।

  4. चक्षु पोर्टल का उपयोग: संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट संचार साथी के 'चक्षु पोर्टल' (www.sancharsaathi.gov.in) पर करें।

  5. हेल्पलाइन नंबर: यदि आप ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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