विकसित भारत @2047 : उत्तर प्रदेश में “समर्थ यूपी” अभियान की शुरुआत

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, संस्कृति और अनुसंधान पर होगा विशेष फोकस
 
विकसित भारत @2047 : उत्तर प्रदेश में “समर्थ यूपी” अभियान की शुरुआत

लखनऊ, सितम्बर।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” विज़न को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बुधवार को राजधानी के लोकभवन सभागार से “समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047” अभियान का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विद्वानों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने राज्य के विकास रोडमैप पर गहन विमर्श किया। कार्यक्रम का उद्देश्य था—2047 तक यूपी को विकसित राज्य के रूप में स्थापित करना और 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना।

स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरणा लेने की अपील

प्रो. विघ्नेश कुमार ने सुझाव दिया कि स्वतंत्रता आंदोलन की गाथाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया जाए। उनका मानना था कि इससे समाज में ऊर्जा, आत्मगौरव और विरासत के सम्मान का भाव निरंतर बना रहेगा।

कृषि और शिक्षा सुधार की आवश्यकता

पूर्व अधिकारी डॉ. विजय सिंह निरंजन ने किसानों के लिए भंडारण व्यवस्था सीधे उनके घर तक पहुंचाने का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने कोचिंग सेंटरों पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक कोचिंग बंद रहनी चाहिए ताकि बच्चे नियमित स्कूल-कॉलेज जाएं और शिक्षा व्यवस्था बेहतर बने। उन्होंने विभिन्न विभागों की समान योजनाओं को एकीकृत करने की आवश्यकता भी जताई।

अभियान का व्यापक प्रसार

सेवानिवृत्त आईपीएस रंजन द्विवेदी ने सुझाव दिया कि इस पूरे अभियान को क्षेत्रवार प्रस्तुत किया जाए और सोशल मीडिया के जरिए जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें।

शिक्षा और रिसर्च में क्रांतिकारी बदलाव

पूर्व आईएएस आनंद कुमार ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में स्किल डेवलपमेंट और भारतीय संस्कारों का समावेश जरूरी है। उन्होंने ट्यूशन कल्चर को कम करने पर जोर दिया और उत्तर प्रदेश में रिसर्च हब व रिसर्च सेंटर स्थापित करने की वकालत की।

बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र

रेलवे विभाग के रिटायर्ड अफसर विजय कुमार दत्त ने सुझाव दिया कि राज्य की 78 हजार किमी सड़क नेटवर्क को रेलवे लाइनों के साथ मैप किया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में थर्मल पावर प्लांट्स को न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।

संस्कृति और परंपराओं का महत्व

संस्कृत विद्वान प्रो. विपिन त्रिपाठी ने योजना में भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि विकास योजना को 12 माह और 12 राशियों के आधार पर जोड़ा जा सकता है और संस्कृत विद्या को इसमें प्रमुखता दी जानी चाहिए।

उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी शैलेन्द्र कपिल ने कहा कि यूपी की मिठाइयों और दूध उत्पादों को देशभर में प्रचारित करने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि इससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उद्योग दोनों को बल मिलेगा।

टाउनशिप और उच्च शिक्षा पर जोर

पूर्व प्रोफेसर ए.के. जयंतली ने सुझाव दिया कि बंजर भूमि पर छोटे-छोटे टाउनशिप बनाए जाएं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास हो सके। उन्होंने खेती योग्य भूमि पर शहरीकरण को रोकने और उच्च शिक्षा में एंड्रोगोगी पद्धति लागू करने की बात कही।

अन्य महत्वपूर्ण सुझाव

  • ओडीओपी (ODOP) उत्पादों के वैश्विक प्रसार पर फोकस

  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को एम्स स्तर तक मजबूत करना

  • हर गांव में वॉटर एटीएम और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता

  • आपदा प्रबंधन और थ्रेट प्रोटेक्शन योजनाएं

  • ग्रामीण क्षेत्रों में शराब ठेकों पर नियंत्रण

  • जनता से संवाद के लिए अधिक समय उपलब्ध कराना

  • विकास मॉडल में संस्कृति, समाज और परिवार को प्राथमिकता

  • पशु-पक्षियों के कल्याण को भी विकास का हिस्सा बनाना

  • कुल बजट का 5% रिसर्च पर खर्च करने का सुझाव

  • सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय संतुलित विकास को महत्व

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