श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव में भजनों पर झूमे श्रद्धालु, युवाओं को मिला चरित्र निर्माण और आध्यात्मिकता का संदेश
तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह उत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। वृंदावन धाम के परम पूज्य डॉ. श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज के श्रीमुख से कथा श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विवाह उत्सव के दौरान बैंड-बाजे, आतिशबाजी और मधुर भजनों ने आयोजन को विशेष बना दिया। पूरा कथा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
युवाओं से संवाद, चरित्र निर्माण पर दिया जोर
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार सुबह 9 बजे से महाराज जी ने श्रद्धालुओं को दीक्षा प्रदान की। इसके बाद अपराह्न 3 से 4 बजे तक युवाओं के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें युवाओं ने अध्यात्म, जीवन और विद्यार्थी जीवन से जुड़े अपने प्रश्न महाराज जी के समक्ष रखे। महाराज जी ने सरल और प्रेरणादायी शब्दों में उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
महाराज जी ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर हो रहे हैं और उनके मन में अध्यात्म को लेकर अनेक जिज्ञासाएं हैं। जिस प्रकार जीवन में पढ़ाई-लिखाई आवश्यक है, उसी प्रकार आध्यात्मिक ज्ञान भी महत्वपूर्ण है। प्रत्येक युवा को अपने चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अच्छे चरित्र के बिना व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन भगवान का भजन करने, गोसेवा को जीवन का हिस्सा बनाने और वर्ष में कम से कम एक बार किसी पवित्र धाम की यात्रा करने की प्रेरणा दी।
विद्यार्थी जीवन में सबसे अधिक खुशी की बात से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में महाराज जी ने कहा कि श्रेष्ठ गुरु का सानिध्य और मार्गदर्शन मिलना विद्यार्थी के जीवन का बड़ा सौभाग्य है। गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को सही दिशा देता है और उसके जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अहंकार त्यागकर ही अनुभव किया जा सकता है भगवान का प्रेम
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान डॉ. श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य रासलीला का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब तक जीव के भीतर ‘मैं’ और अभिमान का भाव रहता है, तब तक वह भगवान के प्रेम की गहराई को पूरी तरह अनुभव नहीं कर पाता। गोपियों के मन में जब क्षणभर के लिए मान का भाव आया, तब श्रीकृष्ण अंतर्ध्यान हो गए।
महाराज जी ने समझाया कि भगवान के सच्चे प्रेम की प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग आवश्यक है। जहां समर्पण, विनम्रता और निष्कपट प्रेम होता है, वहीं भगवान की कृपा का अनुभव होता है।
भगवान श्रीकृष्ण के विरह में गोपियों द्वारा गाए गए गोपी गीत की व्याख्या करते हुए महाराज जी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि गोपी गीत केवल विरह की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवात्मा की परमात्मा से पुनर्मिलन की अलौकिक व्याकुलता का प्रतीक है। गोपियों का प्रेम सांसारिक आकर्षण से परे पूर्ण समर्पण और अनन्य भक्ति का आदर्श प्रस्तुत करता है।
गोपियों के प्रेम ने उद्धव जी का ज्ञानाभिमान किया दूर
उद्धव जी के ब्रज आगमन और गोपियों के साथ उनके संवाद का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि उद्धव जी ज्ञान के प्रतीक थे, लेकिन ब्रज की गोपियों का निश्छल और अनन्य प्रेम देखकर उनका ज्ञानाभिमान दूर हो गया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान की प्राप्ति केवल बौद्धिक ज्ञान से नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, निष्कपट भाव और अनन्य भक्ति से होती है।
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव बना मुख्य आकर्षण
कथा के छठे दिन का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह प्रसंग रहा। महाराज जी ने इस प्रसंग का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए बताया कि रुक्मिणी शुद्ध बुद्धि का प्रतीक हैं, जबकि भगवान श्रीकृष्ण परमात्मा के स्वरूप हैं। जब मनुष्य की बुद्धि शुद्ध होकर परमात्मा की ओर उन्मुख होती है, तब भगवान उसकी सहायता और उद्धार के लिए आगे आते हैं।
व्यासपीठ से रुक्मिणी विवाह प्रसंग का सजीव वर्णन किया गया। विवाह उत्सव के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच उत्सव का उल्लास देखते ही बना। पूरा पंडाल भक्तिरस में डूबा नजर आया।
दिव्यांग भक्त कन्या को व्हीलचेयर सहित कराया महाराज जी के दर्शन
कथा के दौरान सेवा और समर्पण का भावुक दृश्य भी देखने को मिला। आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि एक दिव्यांग भक्त कन्या को स्वयंसेवकों ने व्हीलचेयर सहित अपने कंधों पर उठाकर महाराज जी के दर्शन कराने और उनसे मिलवाने की व्यवस्था की।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक दर्शन कराना ही सच्ची सेवा और भक्ति का स्वरूप है। श्री राधा रमण सेवा समिति का प्रयास है कि कथा में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सहज, सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण मिले।
शनिवार को होगा सामूहिक तर्पण
आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि शनिवार, 10 अक्टूबर को कथा प्रारंभ होने से पूर्व सुबह 9 बजे से पितरों की स्मृति और उनके निमित्त सामूहिक तर्पण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता करने का आग्रह किया।
कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं ने श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज के प्रवचनों, भजनों और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव का आनंद लिया। आयोजन ने आध्यात्मिकता, प्रेम, विनम्रता और सेवा भाव का संदेश दिया।
प्रमुख आयोजक एवं सहयोगी: अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, मुन्ना भैया, समीर मित्तल, शिवम अग्रवाल, नवीन गुप्ता, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी, आर.एन. सिंह, सुनील कुमार मिश्रा, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला और हनी सहित अन्य सहयोगी।
