सरयू घाट पर रामयंत्र की धुन से थम रहे श्रद्धालुओं के कदम, रामभक्ति के सहारे संवर रही छोटे कारोबारियों की आजीविका
दीपोत्सव में रामयंत्र की बिक्री से दोगुनी से अधिक हो रही कमाई, 50 रुपये में मिल रहा एक जोड़ा
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में बढ़े पर्यटकों से छोटे विक्रेताओं को मिला रोजगार का नया अवसर
अयोध्या, 06 नवंबर 2026। रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव की रौनक के बीच सरयू घाटों पर रामभक्ति की एक अनोखी धुन श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। गले में रामयंत्र टांगकर दोनों हाथों से उसकी ताल बजाते विक्रेता रामभक्ति के गीतों के जरिए लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। रामयंत्र की मधुर धुन सुनकर देशी ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी कुछ पल ठहरने को मजबूर हो रहे हैं। कोई इसकी धुन का आनंद ले रहा है तो कोई रामभक्ति की इस निशानी को स्मृति के रूप में अपने साथ ले जा रहा है।
एक जोड़ा रामयंत्र महज 50 रुपये में बेचने वाले ये छोटे कारोबारी आस्था को अपनी आजीविका का आधार बना रहे हैं। दीपोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ से उनकी आमदनी में भी उल्लेखनीय इजाफा हो रहा है।
रामभक्ति के गीतों से ग्राहकों को आकर्षित कर रहे सचींद्रनाथ
गोरखपुर के रहने वाले सचींद्रनाथ सरयू घाट पर रामयंत्र बेचते हैं। वह गले में रामयंत्र टांगकर रामभक्ति के गीत गाते हुए दोनों हाथों से इसकी धुन बजाते हैं। उनकी यह अनोखी प्रस्तुति श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।सचींद्रनाथ बताते हैं कि सामान्य दिनों में रामयंत्र बेचकर उनकी रोजाना 800 से 1000 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जबकि दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर 1800 से 2500 रुपये तक पहुंच जाती है।
उनके लिए यह काम सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि रामभक्ति से जुड़ने का एक माध्यम भी है। वह बताते हैं कि जब श्रद्धालु रामयंत्र की धुन सुनकर रुकते हैं और इसे खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं तो उन्हें खुशी होती है। दीपोत्सव में बढ़ती भीड़ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा देने का अवसर भी देती है।
राम मंदिर निर्माण के बाद बढ़ा रोजगार का अवसर
बिहार के रहने वाले राजेंद्र महतुर की कहानी भी अयोध्या में बदलती आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर पेश करती है। वह पिछले तीन वर्षों से रामयंत्र बेचने का काम कर रहे हैं। सामान्य दिनों में उनकी रोजाना कमाई करीब 800 रुपये रहती है, जबकि दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर लगभग 2000 रुपये तक पहुंच रही है।
राजेंद्र महतुर बताते हैं, "राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में लोगों का आना बढ़ा है। रामयंत्र की धुन सुनकर लोग रुकते हैं और खरीदते हैं। इससे हमारा रोजगार भी अच्छा चल रहा है और रामभक्ति से जुड़े रहने का अवसर भी मिलता है।"वह बताते हैं कि पहले वह दूसरे कामों में लगे थे, लेकिन अब रामयंत्र की बिक्री उनके परिवार की आजीविका का आधार बन गई है।
धार्मिक पर्यटन से छोटे कारोबारियों को मिल रहे नए अवसर
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से धार्मिक पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों के लिए भी नए अवसर सामने आए हैं। सरयू घाटों पर पूजा सामग्री, धार्मिक प्रतीक, खिलौने और अन्य पारंपरिक वस्तुएं बेचने वाले विक्रेताओं को भी पर्यटकों की मौजूदगी से लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में विकास कार्यों और दीपोत्सव जैसे आयोजनों के चलते धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। इसका असर घाटों पर कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं की आजीविका पर भी दिखाई दे रहा है।
सरयू घाटों पर गूंजती रामयंत्र की धुन इस बदलाव की एक सुंदर तस्वीर पेश करती है। यहां रामभक्ति श्रद्धालुओं के लिए आस्था और स्मृति का माध्यम बन रही है, तो वहीं छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का सहारा भी बन रही है।
