डीजीपी सीआईडी विनोद कुमार सिंह ने किया आईजी अखिलेश निगम 'अखिल' की दो पुस्तकों का लोकार्पण

DGP (CID) Vinod Kumar Singh launched two books by IG Akhilesh Nigam 'Akhil'.
 
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लखनऊ। समावेशी साहित्य संस्थान के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में प्रख्यात साहित्यकार एवं पुलिस महानिरीक्षक (आईजी, सीआईडी) अखिलेश निगम 'अखिल' की दो पुस्तकों का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उनकी कहानी संग्रह 'अपने-अपने तर्क' (प्रभात प्रकाशन) तथा समीक्षात्मक ग्रंथ 'अखिल का साहित्य : मनन एवं मूल्यांकन' का विमोचन किया गया। इसी अवसर पर समावेशी साहित्य संस्थान का स्थापना दिवस भी मनाया गया तथा संस्थान के नए लोगो (शुभंकर) का भी लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सीआईडी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनोद कुमार सिंह ने पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए अखिलेश निगम के साहित्यिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभागीय दायित्वों की व्यस्तता के बीच साहित्य सृजन के लिए समय निकालना अत्यंत कठिन कार्य है, जिसे अखिलेश निगम ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से संभव बनाया है।

विशिष्ट अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) आशुतोष कुमार ने कहा कि अखिलेश निगम का व्यक्तित्व जितना सरल, सहज और विनम्र है, उनका साहित्य भी उतना ही सहज, रोचक और पाठकों के लिए प्रेरणादायक है।

कार्यक्रम में ओडिशा से आए साहित्यकार उमेश कुमार प्रजापति 'अलख' ने समावेशी साहित्य संस्थान की स्थापना के उद्देश्य और भावी योजनाओं की जानकारी दी। वहीं प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. दिनेश अवस्थी, डॉ. अमिता दूबे और तरुण प्रकाश ने दोनों पुस्तकों की समीक्षात्मक प्रस्तुति देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

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इस अवसर पर आईजी अखिलेश निगम का जन्मदिन भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। केक काटने से पहले उन्होंने दीप प्रज्वलित कर जन्मदिन मनाने की भारतीय परंपरा का संदेश दिया। प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरीश चंद्र कुशवाहा ने उन्हें माला पहनाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। वहीं हिंदी संस्थान की प्रबंधिका डॉ. अमिता दूबे ने अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर उन्हें सम्मानित किया और जन्मदिन की बधाई दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हरिशंकर मिश्र ने की। उन्होंने अखिलेश निगम के साहित्यिक अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न साहित्यिक विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद कुमार 'प्रमोद' ने अपने प्रभावशाली एवं हास्यपूर्ण अंदाज में किया, जिससे पूरा सभागार साहित्य और मनोरंजन के रंग में सराबोर रहा।

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