मानसिक और तकनीकी धोखाधड़ी का नया हथकंडा है ‘डिजिटल अरेस्ट’

'Digital arrest' is a new tactic of mental and technical fraud.
 
मानसिक और तकनीकी धोखाधड़ी का नया हथकंडा है ‘डिजिटल अरेस्ट’

(किशन लाल शर्मा – विनायक फीचर्स)

डिजिटल युग ने जहाँ आम जीवन को तेज़ और सुविधाजनक बनाया है, वहीं साइबर अपराधों के नए-नए और खतरनाक तरीके भी सामने आए हैं। इन्हीं में से एक है “डिजिटल अरेस्ट”, जो किसी भी तरह की कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि ठगों द्वारा रची गई एक सुनियोजित मानसिक और तकनीकी ठगी है।

डिजिटल अरेस्ट का कानून से कोई लेना-देना नहीं है। इसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम विभाग या अदालत का अधिकारी बताकर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं। वे वीडियो कॉल, फोन कॉल या मैसेज के ज़रिये दावा करते हैं कि व्यक्ति के नाम से कोई गंभीर अपराध हुआ है।

अक्सर ठग यह कहते हैं कि आपके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई हैआपका सिम, आधार या पासपोर्ट किसी अवैध गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है इसके बाद वे व्यक्ति को तथाकथित “ऑनलाइन निगरानी” या “डिजिटल हिरासत” में होने का डर दिखाते हैं और चेतावनी देते हैं कि वह घर से बाहर नहीं जा सकता और न ही किसी से संपर्क कर सकता। डर और घबराहट में व्यक्ति लगातार ठगों के संपर्क में रहता है और अंततः उनके बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर कर देता है।

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डिजिटल अरेस्ट के आम तौर पर अपनाए जाने वाले तरीके

अब तक सामने आए मामलों में ठगों द्वारा अपनाई जाने वाली कुछ सामान्य चालें इस प्रकार हैं—अचानक वीडियो कॉल करना और पुलिस की वर्दी या सरकारी बैकग्राउंड दिखानाफर्जी गिरफ्तारी वारंट या एफआईआर की पीडीएफ भेजनाकॉल काटने पर तुरंत गिरफ्तारी की धमकी देनागोपनीयता का हवाला देकर परिवार या दोस्तों से बात न करने को कहना अंत में “जांच निपटाने” या “केस खत्म करने” के नाम पर जुर्माना या फीस मांगना

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें

डिजिटल अरेस्ट से बचना आसान है, क्योंकि यह पूरी तरह गैर-कानूनी और फर्जी प्रक्रिया है। भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे लेकर किसी मामले को खत्म करती है।इसलिए डरें नहीं, तुरंत कॉल काट देंनजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल से संपर्क करेंकभी भी किसी को पैसे ट्रांसफर न करेंयाद रखें, सरकारी एजेंसियां कभी भी गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टो करेंसी या निजी खाते में पैसे नहीं मांगतीं

इन बातों का विशेष ध्यान रखें

अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार नंबर, बैंक डिटेल, ओटीपी या पासवर्ड किसी से साझा न करेंपरिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत बात करेंठग आपको अकेला और डरा हुआ रखना चाहते हैं, इसलिए संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी हैजितनी जल्दी संभव हो, साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं सतर्कता ही इस तरह की साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है।

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