UP में डिजिटल क्रांति: अब ई-ऑफिस से ही संचालित होंगी पत्रावलियां; लखनऊ मण्डल के सभी 6 जिलों को सख्त निर्देश जारी
लखनऊ | 27 मार्च 2026 उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता और 'पेपरलेस वर्क कल्चर' को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ मण्डल के शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। संयुक्त शिक्षा निदेशक (JDE) डॉ. प्रदीप कुमार ने लखनऊ मण्डल के सभी छह जनपदों—लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, उन्नाव, हरदोई और रायबरेली के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालयों को ई-ऑफिस प्रणाली अपनाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
ई-ऑफिस का मुख्य उद्देश्य: पारदर्शिता और गति
ई-ऑफिस कार्यप्रणाली का प्राथमिक लक्ष्य सरकारी फाइलों के अंबार को खत्म कर उन्हें डिजिटल रूप देना है। इससे न केवल पत्रावलियों के खोने का डर खत्म होगा, बल्कि फाइलों के निस्तारण में लगने वाले समय में भी भारी कमी आएगी। डॉ. प्रदीप कुमार ने स्पष्ट किया कि अब समस्त शासकीय पत्राचार अनिवार्य रूप से ई-ऑफिस के माध्यम से ही व्यावहरित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साप्ताहिक समीक्षा
लखनऊ मण्डल के विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस बदलाव को लेकर अत्यंत गंभीर है।
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मॉनिटरिंग: प्रत्येक जनपद और मण्डलीय कार्यालय में ई-ऑफिस के माध्यम से होने वाले कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है।
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अनिवार्यता: ड्राइवर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर प्रत्येक कार्मिक के लिए इस प्रणाली को अपने 'वर्क कल्चर' का हिस्सा बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रशिक्षण और संसाधन: UPLC की भूमिका
कार्मिकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए नोडल संस्था यू.पी.एल.सी. (UPLC) द्वारा व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं:
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प्रशिक्षण सत्र: फरवरी 2025 से फरवरी 2026 तक निरंतर ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं।
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वीडियो ट्यूटोरियल: यदि किसी कार्मिक को कार्यप्रणाली समझने में समस्या आती है, तो वे UPLC के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध प्रशिक्षण वीडियो देख सकते हैं:
जमीनी स्तर पर बदलाव की तैयारी
डॉ. दिनेश कुमार के अनुसार, ई-ऑफिस को रूटीन में लाने के लिए सभी जिलों के कार्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे पोर्टल पर उपलब्ध वीडियो का उपयोग कर अपनी दक्षता बढ़ाएं। इस कदम से उत्तर प्रदेश का शिक्षा विभाग आधुनिकतम कार्यप्रणाली की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से शिक्षा विभाग के कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता के कार्यों में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी। यह कदम 'डिजिटल उत्तर प्रदेश' के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगा।
