सीमा पार से डिजिटल जाल: भारतीय युवाओं को गुमराह करने की पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की नई साजिश

Cross-border digital web: Pakistani intelligence agency's new plot to mislead Indian youth.
 
सीमा पार से डिजिटल जाल: भारतीय युवाओं को गुमराह करने की पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की नई साजिश

लेखक: विभूति फीचर्स (सुभाष आनंद के इनपुट्स के साथ)     वैश्विक आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ ने अब एक नया और अधिक खतरनाक रूप ले लिया है। पाकिस्तान की प्रसिद्ध मासिक पत्रिका 'हेराल्ड' और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) और विभिन्न आतंकी संगठन अब भारत के उच्च शिक्षित, कुशाग्र और हताश युवाओं को अपना निशाना बनाने की फिराक में हैं।

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1. मासूमों का अपहरण और आत्मघाती दस्ता

'हेराल्ड' के वरिष्ठ पत्रकार अजमेर कुरैशी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकी संगठन बच्चों और किशोरों की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त कर रहे हैं।

  • मजबूर बचपन: भारत-पाक सीमा के करीब स्थित गांवों, मस्जिदों, मदरसों और भीड़भाड़ वाले बाजारों से 13 से 15 वर्ष के बच्चों का अपहरण किया जाता है।

  • अमानवीय प्रशिक्षण: इन बच्चों को बंधक बनाकर उन पर अत्याचार किए जाते हैं और जबरन आत्मघाती हमलावर (Suicide Bombers) बनने की ट्रेनिंग दी जाती है।

  • क्रूर व्यापार: एक बार इन बच्चों को आत्मघाती जैकेट पहना दी जाए, तो उनके पास सामान्य जीवन में लौटने का कोई रास्ता नहीं बचता। कई बार इन बच्चों की रिहाई के बदले मोटी फिरौती भी वसूली जाती है।

2. 'नया गुरु मंत्र': शिक्षित और बेरोजगार युवाओं पर नजर

सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़े आतंकवादियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तानी सेना और ISI ने अब रणनीति बदल दी है। वे भारत के भीतर अशांति फैलाने के लिए 'नया गुरु मंत्र' अपना रहे हैं:

  • हताशा का फायदा: भारत के सीमावर्ती राज्यों में रहने वाले बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं की मानसिक खीझ का फायदा उठाना।

  • आर्थिक प्रलोभन: युवाओं को भारी वित्तीय लालच और सुनहरे भविष्य के झूठे सपने दिखाकर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल करना।

  • भड़काऊ नैरेटिव: शिक्षित और साधन संपन्न वर्ग के लोगों को धार्मिक दुहाई और भड़काऊ नारे देकर कट्टरपंथ की ओर धकेलना।

3. पंजाब सीमा पर बढ़ता ड्रोन और ड्रग्स का खतरा

पंजाब के सीमावर्ती जिलों—फिरोजपुर, फाजिल्का, तरनतारन, अमृतसर और गुरदासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (SSPs) ने इस बात की पुष्टि की है कि पाकिस्तानी तस्कर और गुप्तचर एजेंसियां सीमा पर विशेष रूप से सक्रिय हैं।

  • ड्रोन तकनीक का दुरुपयोग: रात के अंधेरे में पाकिस्तान की तरफ से आने वाले ड्रोन न केवल नशीले पदार्थ (ड्रग्स) बल्कि घातक आधुनिक हथियार और बम भी गिरा रहे हैं।

  • सुरक्षा बलों की चुनौती: सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन से भेजे जाने वाले हथियारों का एक हिस्सा स्थानीय तस्करों और राष्ट्रविरोधी तत्वों तक पहुंच जाता है, जो पंजाब की शांति भंग करने की बड़ी साजिश का हिस्सा है। पिछले दिनों पंजाब में पुलिस दफ्तरों को निशाना बनाने के पीछे भी इसी नेटवर्क का हाथ था।

4. खालिस्तानी तत्वों का गठजोड़ और सरकार की मुस्तैदी

इस पूरे नेटवर्क को हवा देने में विदेशों में बैठे खालिस्तानी आतंकवादी भी पीछे नहीं हैं। वे भी स्थानीय हताश युवाओं को बरगलाने के लिए ISI के साथ मिलकर नई चालें चल रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती राज्यों की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटेलिजेंस नेटवर्क (गुप्तचर तंत्र) को और मजबूत करने तथा युवाओं को गुमराह करने वाले संदिग्ध तत्वों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पाकिस्तान की यह नई चाल बंदूक और बारूद से आगे बढ़कर युवाओं के भविष्य और देश की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। इस खतरे से निपटने के लिए केवल सैन्य मुस्तैदी ही काफी नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और उन्हें इस डिजिटल और आर्थिक जाल के प्रति जागरूक करना भी बेहद जरूरी है।

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