दिनेश चन्द्र वर्मा: जिन्होंने पत्रकारिता को धर्म बनाकर जिया

Dinesh Chandra Verma: Who lived journalism as a religion
 
Dinesh Chandra Verma: Who lived journalism as a religion

(मुकेश "कबीर" – विनायक फीचर्स)

विनायक फीचर्स के संस्थापक स्वर्गीय दिनेश चन्द्र वर्मा ऐसा नाम हैं, जिनकी पहचान आदर्श पत्रकारिता की मिसाल के रूप में होती है। उन्होंने पत्रकारिता को कभी पेशा नहीं माना, बल्कि इसे अपना धर्म समझकर पूरी निष्ठा और ईमानदारी से जिया। उनका व्यक्तित्व ही उनके कृतित्व का प्रतिबिंब था—लंबे बाल, सम्मोहक आंखें और विद्वत्ता से भरा हुआ व्यक्तित्व, जो किसी भी अजनबी को पहली नज़र में बता देता था कि सामने खड़ा व्यक्ति पत्रकार है।

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ज्ञान और विद्वत्ता के धनी

दिनेश जी हर विषय पर इतनी गहरी पकड़ रखते थे कि उनके वार्तालाप में विद्वानों जैसी गहराई झलकती थी। विशेषकर प्राचीन इतिहास पर उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि बड़े-बड़े इतिहासकार और प्रशासनिक अधिकारी उनसे परामर्श लेते थे। उनके लेख कई ब्यूरोक्रेट्स के लिए संदर्भ सामग्री का काम करते थे। उन्हें पढ़ने का अद्भुत शौक था—तकिए के पास हमेशा ढेरों किताबें रहतीं और बहस की स्थिति आने पर तुरंत संबंधित पुस्तक का पृष्ठ खोलकर तथ्य रख देते।

लेखन की विशिष्ट पहचान

उनकी लेखनी 70 और 80 के दशक में लगभग हर अखबार और पत्रिका में प्रकाशित होती थी। धर्मयुग, सरिता, मुक्ता, कादम्बिनी, माया और अवकाश जैसी प्रमुख पत्रिकाएँ उनसे लेख की डिमांड करती थीं। स्वतंत्र पत्रकारिता के दौर में भी उन्हें कभी काम की कमी नहीं हुई। कई बार तो पत्रिकाएँ उन्हें अग्रिम भुगतान कर देतीं और अगले अंक का विषय भी तय कर देतीं। यही कारण था कि वे उस समय के सबसे व्यस्त स्वतंत्र पत्रकारों में गिने जाते थे।

निष्पक्ष और निडर पत्रकार

उनकी ईमानदार पत्रकारिता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि बड़े से बड़े मंत्री और अधिकारी भी उनसे झुककर मिलते थे। राजनीति की गहरी समझ के चलते वे चुनावी नतीजों का सटीक पूर्वानुमान लगा देते थे। उदाहरण के तौर पर, 2018 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जब हर कोई बीजेपी की लहर की बात कर रहा था, उन्होंने दृढ़ता से कहा था कि कमलनाथ ही मुख्यमंत्री बनेंगे—और यही सच साबित हुआ।

पत्रकारिता का स्वर्णिम दौर

दिनेश जी ने उस युग में पत्रकारिता शुरू की थी जब पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सत्य, नैतिकता और विद्वत्ता होता था। तब अखबारों की प्रतिष्ठा उनकी इमारतों से नहीं, बल्कि उनकी खबरों और लेखों से होती थी। वे धर्मवीर भारती और आर. के. करंजिया जैसे संपादकों से प्रभावित थे, जिनकी लेखनी सरकारों को भी झुका सकती थी। इसी दौर में उन्होंने वचनबद्ध नामक अपना साप्ताहिक अखबार शुरू किया, जो न सिर्फ विदिशा जिले का प्रतिनिधि बना, बल्कि प्रदेश के प्रतिष्ठित साप्ताहिकों में भी शुमार हुआ। आज भी वचनबद्ध उसी समर्पण के साथ प्रकाशित हो रहा है और उनकी स्मृतियों को जीवित रखे हुए है।

स्मृतियों को नमन

दिनेश चन्द्र वर्मा सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि पत्रकारिता के आदर्श थे। उन्होंने अपने परिश्रम, निडरता और विद्वत्ता से यह साबित कर दिया कि पत्रकारिता अगर धर्म की तरह निभाई जाए, तो यह समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और शत-शत नमन अर्पित करते हैं।

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