कथक गुरु पंडित अर्जुन मिश्रा को शिष्यों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन, नृत्य प्रस्तुतियों से दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Disciples paid tribute to Kathak guru Pandit Arjun Mishra, offering their heartfelt homage through dance performances.
 
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लखनऊ, 22 अक्टूबर। कथक के महान गुरु पंडित अर्जुन मिश्रा की पुण्यतिथि पर लखनऊ स्थित पंडित कालिका-बिंदादीन महाराज ड्योढ़ी एवं कथक संग्रहालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पंडित अर्जुन मिश्रा की वरिष्ठ शिष्या एवं कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह ने किया। इस अवसर पर गुरु के शिष्यों ने कथक की प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी कला एवं शिक्षाओं को याद किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद पंडित अर्जुन मिश्रा के जीवन और कला साधना पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गई। फिल्म में कल्चर क्वेस्ट की सचिव सुरभि सिंह ने अपनी आवाज दी। कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महान कलाकार अपनी कला, विचारों और शिष्यों के माध्यम से सदैव जीवित रहते हैं।

शिष्यों ने कथक प्रस्तुतियों से दी गुरु को श्रद्धांजलि

गुरु सुरभि सिंह के शिष्यों ईशा रतन, मीशा रतन, अंकिता मिश्रा, आकांक्षा पांडे, संगीता कश्यप, आरती कुशवाहा, सुंदर सिंह, मानसी और अनुभव ने कथक की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम की शुरुआत ‘श्रीनिवासा गोविंदा’ और ‘ओम नमो’ की वंदना एवं भाव प्रस्तुति से हुई। इसके बाद पंचम सवारी में नई रचनाओं का प्रदर्शन किया गया।

प्रस्तुतियों में शास्त्रीय कथक की परंपरा के साथ नए प्रयोगों की झलक भी देखने को मिली। तबले पर अरुण भट्ट और सारंगी पर जीशान ने संगत की, जबकि कथक गुरु सुरभि सिंह ने पढ़ंत के माध्यम से प्रस्तुतियों को प्रभावशाली बनाया।

वरिष्ठ कलाकारों ने साझा किए गुरु के संस्मरण

कार्यक्रम के दौरान लखनऊ के कई वरिष्ठ कलाकारों ने पंडित अर्जुन मिश्रा के साथ जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इनमें श्री राम मोहन, रामेश्वरी मिश्रा, मिथिलेश लखनवी और रत्नेश मिश्रा प्रमुख रूप से शामिल रहे। वक्ताओं ने पंडित अर्जुन मिश्रा के व्यक्तित्व, उनकी कला साधना और कथक के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि पंडित अर्जुन मिश्रा के शिष्य देश-विदेश में कलाकारों और गुरुओं के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके द्वारा दी गई कथक की शिक्षा और संस्कारों को आगे बढ़ाना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम में शिष्य परंपरा के माध्यम से कला के संरक्षण और विकास के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

कथक गुरुओं की शिक्षाओं को पुस्तकों में संकलित करने की पहल

कार्यक्रम के अंत में अथर्व इंडिया अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान के संस्थापक डॉ. वीबी पांडेय ने कथक के महान गुरुओं के जीवन, योगदान और शिक्षाओं को लिपिबद्ध कर पुस्तकों के रूप में प्रकाशित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस पहल से शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और महान गुरुओं की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम का संचालन संजय मल्होत्रा ‘हमनवा’ ने किया। अंत में उपस्थित कलाकारों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। श्रद्धांजलि समारोह ने गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंतता और कथक की विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प को एक बार फिर रेखांकित किया।

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