केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा

अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने कहा कि मनुष्य को स्वयं को केवल शरीर तक सीमित नहीं मानना चाहिए, बल्कि आत्मा के स्वरूप को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी जीव परमात्मा के अंश हैं और श्रीकृष्ण को परम पुरुषोत्तम भगवान के रूप में स्वीकार किया जाता है। उन्होंने सनातन परंपरा और उसके आध्यात्मिक मूल्यों पर भी अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करना चाहिए। उनके अनुसार, गीता जीवन को समझने और जीने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि गीता के अध्ययन को गुरु के मार्गदर्शन में करने से उसके संदेश और शिक्षाओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिल सकती है।

इसी क्रम में उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और उपस्थित गणमान्य लोगों को प्रत्येक रविवार आयोजित होने वाली ऑनलाइन गीता चर्चा से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के एक-एक श्लोक पर नियमित रूप से चर्चा की जाती है।

अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देवभाषा संस्कृत के अध्ययन और प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें उपस्थित लोगों ने विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने आध्यात्मिक एवं तर्कपूर्ण दृष्टिकोण से उत्तर दिया। कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ हुआ।
निवेदक:
इस्कॉन मीडिया समूह
श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर, सेक्टर एफ, सुशांत गोल्फ सिटी, सुलतानपुर रोड, लखनऊ
