ज्वालापुर में कांग्रेस के भीतर बढ़ा असंतोष, चुनाव से पहले बढ़ीं मुश्किलें

Dissatisfaction within the Congress rises in Jwalapur; difficulties mount ahead of the election.
 
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हरिद्वार/राजनीतिक डेस्क: उत्तराखंड की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। इस बीच, हरिद्वार जनपद की ज्वालापुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष के सुर मुखर होने लगे हैं। स्थानीय राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, वर्तमान कांग्रेस विधायक रवि बहादुर की कार्यशैली को लेकर क्षेत्र के मुस्लिम मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस आलाकमान ने समय रहते इस असंतोष को दूर नहीं किया, तो ज्वालापुर सीट के साथ-साथ पूरे हरिद्वार जनपद और प्रदेश की अन्य सीटों पर भी कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ज्वालापुर का जातीय और सामाजिक समीकरण: क्यों बैकफुट पर हैं विधायक?

ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां जीत का रास्ता सामाजिक और जातीय तालमेल से होकर ही गुजरता है। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुमानित जनसांख्यिकीय आंकड़े (Demographic Equations) इस प्रकार हैं:

  • मुस्लिम समाज: लगभग 40 प्रतिशत (सबसे बड़ा मतदाता वर्ग)

  • रविदास समाज (जाटव): लगभग 35 प्रतिशत

  • वाल्मीकि समाज: लगभग 1 प्रतिशत

  • अन्य समाज: लगभग 24 प्रतिशत

स्थानीय कार्यकर्ताओं और नाराज गुटों का आरोप है कि विधायक रवि बहादुर इन दोनों प्रमुख समाजों (मुस्लिम और रविदास समाज) को साधने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन पर समाज के लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने और संगठन के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

2022 की जीत का गणित और वर्तमान चुनौतियां

राजनीतिक जानकारों का तर्क है कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर रवि बहादुर की जीत का मुख्य कारण उनका अपना मजबूत जनाधार नहीं, बल्कि तत्कालीन भाजपा विधायक और प्रत्याशी सुरेश राठौर के खिलाफ जनता और स्थानीय कैडर का एकतरफा और भारी विरोध था। एंटी-इंकंबेंसी (Anti-incumbency) की उस लहर का फायदा कांग्रेस को मिला था।

मगर वर्तमान स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब जनता की नाराजगी खुद वर्तमान कांग्रेस विधायक के खिलाफ है। क्षेत्र में जगह-जगह 'रवि बहादुर हटाओ, कांग्रेस पार्टी बचाओ' के नारे लग रहे हैं और उनके विरोध में सम्मेलनों का दौर शुरू हो चुका है।

वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन से भड़का मुस्लिम समाज

इस पूरे विवाद में घी का काम पार्टी के दो बड़े स्थानीय चेहरों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई ने किया है। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त वरिष्ठ नेता नासिर अली और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष जुनैद राणा को कथित तौर पर विधायक के दबाव में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

ये दोनों ही नेता न केवल ज्वालापुर बल्कि पूरे हरिद्वार जनपद में कांग्रेस के प्रति समर्पित रहे हैं और उनका अपने-अपने समाजों में अच्छा-खासा राजनीतिक प्रभाव है। इन प्रमुख नेताओं पर हुई कार्रवाई से मुस्लिम मतदाता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगने का खतरा पैदा हो गया है।

कांग्रेस आलाकमान के सामने बड़ी दुविधा

उत्तराखंड की राजनीति में मुस्लिम, रविदास और शिल्पकार समाज पारंपरिक रूप से कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते रहे हैं। ऐसे में ज्वालापुर के जमीनी हालात को देखते हुए यह साफ है कि यदि पार्टी आगामी चुनाव में रवि बहादुर को दोबारा चुनावी मैदान में उतारती है, तो न केवल यह सीट हाथ से निकल सकती है, बल्कि इसका नकारात्मक संदेश पूरे प्रदेश में जाएगा। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इन नाराज धड़ों को मनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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