मैक्स अस्पताल, लखनऊ के डॉक्टरों ने नेपाल के 19 माह के बच्चे को दी नई ज़िंदगी , जन्मजात किडनी और गॉल ब्लैडर की दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज
Successful treatment of a rare congenital kidney and gallbladder disease
लखनऊ, 28 जनवरी 2026। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ के डॉक्टरों ने नेपाल से आए 19 महीने के एक बच्चे का सफल इलाज कर उसे नई ज़िंदगी दी है। बच्चे में किडनी और गॉल ब्लैडर से जुड़ी जन्मजात और अत्यंत दुर्लभ बीमारियां एक साथ पाई गई थीं, जिससे उसकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।
बच्चा हॉर्सशू किडनी से पीड़ित था, जिसमें दोनों किडनियां आपस में जुड़कर घोड़े की नाल के आकार की बन जाती हैं। इसके साथ ही उसे दोनों किडनियों में बाइलेटरल यूरेटर पेल्विक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन (UPJO) की समस्या थी, जिससे पेशाब निकलने का रास्ता बाधित हो रहा था। इस कारण दोनों किडनियां अत्यधिक सूज गई थीं और पेट के अधिकांश हिस्से में फैल चुकी थीं, जिससे किडनी फेल होने का गंभीर खतरा बन गया था। इसके अलावा बच्चे के गॉल ब्लैडर और कॉमन बाइल डक्ट (CBD) में भी पथरी पाई गई।
नेपाल में कई अस्पतालों में परामर्श के बावजूद बच्चे की कम उम्र और बीमारी की जटिलता को देखते हुए सर्जरी संभव नहीं मानी गई। इसके बाद परिजन बच्चे को मैक्स अस्पताल, लखनऊ लेकर आए, जो उन्नत बाल यूरोलॉजी और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के लिए जाना जाता है।
बच्चे की स्थिति के बारे में बताते हुए डॉ. राहुल यादव, डायरेक्टर, यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक यूरो-ऑन्कोलॉजी, मैक्स अस्पताल, लखनऊ ने कहा, जब बच्चा हमारे पास आया, तब दोनों किडनियां अत्यधिक सूजी हुई थीं और पेट के बड़े हिस्से में फैल चुकी थीं। इतने छोटे बच्चे में सीमित जगह में सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए हमने एक ही एनेस्थीसिया में विभिन्न विभागों की टीम के साथ मिलकर सर्जरी की योजना बनाई।”
करीब 4 घंटे चली सर्जरी में यूरोलॉजी टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से दोनों किडनियों की रुकावट दूर की और पेशाब के रास्ते को खुला रखने के लिए स्टेंट लगाए। वहीं गैस्ट्रो सर्जरी टीम ने लैप्रोस्कोपिक विधि से गॉल ब्लैडर को निकाला। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम ने कॉमन बाइल डक्ट में मौजूद पथरी का दवाओं से इलाज किया और आवश्यकता पड़ने पर एंडोस्कोपिक प्रक्रिया की तैयारी भी रखी।
टीमवर्क पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अजय यादव, डायरेक्टर एवं हेड, रोबोटिक सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी एवं जीआई ऑन्कोलॉजी, मैक्स अस्पताल, लखनऊ ने कहा, यूरोलॉजी सर्जरी में लगाए गए उन्हीं पोर्ट्स का उपयोग गॉल ब्लैडर सर्जरी के लिए भी किया गया, जिससे अतिरिक्त चीरे नहीं लगाने पड़े। इससे बच्चे को बार-बार सर्जरी और बेहोशी से बचाया जा सका और उसकी रिकवरी तेजी से हुई।”
सर्जरी पूरी तरह सफल रही। ऑपरेशन के 12 घंटे के भीतर बच्चे को दूध पिलाना शुरू कर दिया गया और केवल 4 दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। इस बारे में डॉ. एम. यू. हसन, डायरेक्टर एवं एचओडी, पीडियाट्रिक एवं नियोनैटोलॉजी विभाग, मैक्स अस्पताल, लखनऊ ने कहा,“समय पर इलाज न मिलने पर बच्चे के विकास और जीवन दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। सफल सर्जरी के बाद अब उसे सामान्य और स्वस्थ जीवन का पूरा अवसर मिला है।” यह सफल और दुर्लभ उपचार मैक्स अस्पताल, लखनऊ की उन्नत बाल चिकित्सा सुविधाओं, कम चीरे वाली सर्जरी और बहु-विभागीय समन्वय की उत्कृष्ट मिसाल है।
