निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की मांग, डॉ. आंबेडकर सामाजिक एकता मंच ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

Demand for implementing reservation in the private sector: Dr. Ambedkar Social Unity Forum sends memorandum to the Prime Minister.
 
निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की मांग, डॉ. आंबेडकर सामाजिक एकता मंच ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

लखनऊ। डॉ. आंबेडकर सामाजिक एकता मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर निजी क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी वीरेंद्र कुमार की ओर से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि वैश्वीकरण और बदलते आर्थिक परिदृश्य के कारण सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित हो रहे हैं,

जबकि निजी क्षेत्र रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। मंच का कहना है कि रोजगार के बदलते स्वरूप को देखते हुए सामाजिक न्याय और समान अवसर की व्यवस्था को निजी क्षेत्र तक भी विस्तार देने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

निजी कंपनियों में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग

ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं के लिए निजी कंपनियों में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ठोस कानून अथवा प्रभावी नीति बनाए जाने की मांग की है।

मंच ने कहा कि निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ यह आवश्यक है कि समाज के वंचित वर्गों को भी इन अवसरों में पर्याप्त भागीदारी मिले।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

संगठन ने निजी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा सामाजिक प्रतिनिधित्व से संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके तहत कंपनियों को अपने कर्मचारियों में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व की वार्षिक रिपोर्ट जारी करने के लिए बाध्य किए जाने का सुझाव दिया गया है।

कौशल विकास और प्रोत्साहन की मांग

मंच ने वंचित वर्गों के युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ ऐसे निजी संस्थानों को सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन, विशेष छूट या अन्य इंसेंटिव देने की मांग की है, जो इन वर्गों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं।

संगठन ने तर्क दिया कि देश के आर्थिक विकास में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। निजी कंपनियों को कई स्तरों पर सरकारी नीतियों, रियायती भूमि, कर छूट और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलता है। ऐसे में मंच का मानना है कि समावेशी विकास, समान अवसर और सामाजिक न्याय के उद्देश्य से निजी क्षेत्र में भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए।

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