साहित्य के क्षेत्र में डॉ. रश्मि श्रीवास्तव को विशिष्ट सम्मान
यह सारस्वत समारोह डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव साहित्यिक संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आयोजन हिंदी संस्थान, लखनऊ के प्रथम संपादक रहे डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव की 105वीं जयंती के अवसर पर किया गया।
समारोह में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली अनेक साहित्यिक विभूतियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें श्री देवकी नंदन शांत, श्री पद्मकांत शर्मा ‘प्रभात’, डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. नागेश पांडेय, डॉ. कविंद्र कुमार राजपूत, श्रीमती सीमा श्रीवास्तव और श्रीमती स्मिता अश्विन शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अलका प्रमोद की पुस्तक ‘साहित्य साधक वैज्ञानिक डॉ. रामकठिन सिंह’ का लोकार्पण भी किया गया। पुस्तक में डॉ. रामकठिन सिंह के साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के साथ उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को विस्तार से रेखांकित किया गया है। पुस्तक का विमोचन समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा।
सम्मान प्राप्त करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में डॉ. रश्मि श्रीवास्तव ने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन के अत्यंत यादगार सम्मानों में से एक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर मिला यह सम्मान उनके लिए विशेष गौरव और प्रसन्नता का विषय है।
डॉ. रश्मि श्रीवास्तव की साहित्यिक उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया गया कि उनकी लगभग एक दर्जन पुस्तकें देश के प्रतिष्ठित प्रकाशनों से प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा और उपलब्धियों का श्रेय अपने पति इंजीनियर ए.के. श्रीवास्तव तथा दोनों बच्चों अमृतांश श्रीवास्तव और अभिनव श्रीवास्तव को दिया।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में बाल साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बच्चों में संस्कार, रचनात्मकता, संवेदनशीलता और राष्ट्रबोध विकसित करने में साहित्य प्रभावी माध्यम बन सकता है।
समारोह में डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव साहित्यिक संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष इंजीनियर विनय श्रीवास्तव ने कहा कि अपने पिता डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव की जयंती के अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करने की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर डॉ. रामकठिन सिंह, डॉ. मिथिलेश दीक्षित, डॉ. अमिता दुबे और श्रीमती अलका प्रमोद सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में साहित्य, शिक्षा और समाज के क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। साथ ही साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का संकल्प लिया गया।
