तापमान में गिरावट से कीट-रोगों का खतरा बढ़ा : महेश चन्द्र
The risk of insect-diseases has increased due to the drop in temperature: Mahesh Chandra
Wed, 31 Dec 2025
लखनऊ। जिला कृषि रक्षा अधिकारी लखनऊ महेश चन्द्र ने बताया कि वर्तमान में तापमान में गिरावट एवं आर्द्रता में वृद्धि के कारण रबी फसलों में लगने वाले कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। इसे देखते हुए किसानों को समय रहते बचाव एवं प्रबंधन के उपाय अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि गेहूँ की फसल में चौड़ी एवं सँकरी पत्ती वाले खरपतवार जैसे गुल्ली डंडा, जंगली जई, चटरी-मटरी, बथुआ एवं हिरनखुरी की समस्या देखी जा रही है। सँकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 75% डब्ल्यू.पी. की 33 ग्राम (2.5 यूनिट) अथवा क्लोडिनोफॉप प्रोपारजिल 15% डब्ल्यू.पी. की 400 ग्राम मात्रा को 300-400 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था में छिड़काव करें। खड़ी फसल में दीमक एवं गुजिया के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफॉस 20% ई.सी. 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
माहू कीट के जैविक नियंत्रण के लिए एजाडिरेक्टिन 0.15% ई.सी. 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर को 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण हेतु डाईमैथोएट 30% ई.सी. अथवा थायोमेथॉक्साम 25% डब्ल्यू.जी. का प्रयोग लगभग 750 लीटर पानी में घोलकर करें।
पीली गेरूई रोग के नियंत्रण हेतु प्रोपीकोनाजोल 25% ई.सी. 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
सरसों एवं तोरिया की फसल में आरा मक्खी एवं बालदार सूंडी के नियंत्रण हेतु डाईमैथोएट 30% ई.सी. 1 लीटर अथवा क्विनालफॉस 25% ई.सी. 1.25 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
लीफ माइनर एवं माहू के जैविक नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन (नीम ऑयल) 0.15% ई.सी. 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण हेतु ऑक्सीडीमेटॉन-मिथाइल 25% ई.सी., क्लोरपाइरीफॉस 20% ई.सी. या डाईमैथोएट 30% ई.सी. 1-1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग के नियंत्रण हेतु मैनकोजेब 75% डब्ल्यू.पी. अथवा जिनेब 75% की 2.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
तुलासिता रोग के नियंत्रण हेतु मैनकोजेब 75% डब्ल्यू.पी., जिनेब 75% की 2.0 किग्रा अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% डब्ल्यू.पी. की 3.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
