शराब पीकर वाहन चलाना सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा: अपर्णा यादव बिष्ट

लखनऊ में सड़क सुरक्षा और नशे में ड्राइविंग पर हितधारक परामर्श आयोजित, जागरूकता और प्रभावी प्रवर्तन पर दिया गया जोर

 
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लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और नशे की हालत में वाहन चलाने की समस्या से निपटने के लिए शुक्रवार को लखनऊ में हितधारक एवं जन-परामर्श का आयोजन किया गया। कंज्यूमर वॉइस और कंज्यूमर गिल्ड ने जननायक सुजीत पांडेय चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश स्टेट सेंटर में यह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सड़क सुरक्षा, जनस्वास्थ्य, यातायात प्रवर्तन, कानून, उद्योग, मीडिया और नागरिक समाज से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य नशे में वाहन चलाने की घटनाओं को रोकने, सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और लोगों को जिम्मेदार यातायात व्यवहार के प्रति जागरूक करने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करना था। आयोजन में पैनल चर्चा के साथ प्रश्नोत्तर और संवाद सत्र भी हुआ।

परामर्श का उद्घाटन उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बिष्ट ने किया। उन्होंने नशे में वाहन चलाने की समस्या से निपटने के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को भी जरूरी बताया।

सड़क सुरक्षा साझा जिम्मेदारी’

अपर्णा यादव बिष्ट ने कहा, “शराब पीकर गाड़ी चलाना सड़क सुरक्षा की एक गंभीर चिंता है, जिसके परिणाम जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकते हैं। इस समस्या का समाधान केवल कानूनों और प्रवर्तन से नहीं होगा। इसके लिए निरंतर जन-शिक्षा और जागरूकता, व्यवहार में परिवर्तन और ऐसी प्रभावी संवाद-रणनीतियां जरूरी हैं, जो जनता, विशेषकर युवाओं को जोड़ सकें।”

उन्होंने कहा कि सड़कों को सुरक्षित बनाना आज की सबसे अहम चुनौतियों में से एक है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर जिम्मेदार सड़क व्यवहार के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता मजबूत करनी होगी, ताकि प्रत्येक सड़क उपयोगकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक

यह परामर्श उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों के गंभीर आंकड़ों की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साझा की गई जानकारी के अनुसार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 46,052 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 24,118 लोगों की मौत हुई। यह संख्या देश के राज्यों में सबसे अधिक बताई गई।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाने से संबंधित दुर्घटनाओं में 3,375 लोगों की मौत हुई, जिनमें उत्तर प्रदेश में लगभग 1,229 मौतें दर्ज की गईं। यह कुल संख्या का करीब 36.4 प्रतिशत है।

इन आंकड़ों के मद्देनजर कार्यक्रम में नशे में ड्राइविंग की रोकथाम, यातायात नियमों के प्रभावी पालन और सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव

परामर्श में राज्य मद्यनिषेध अधिकारी आर. एल. राजवंशी, बलरामपुर अस्पताल की गैर-संचारी रोग अधिकारी डॉ. रुखसाना तबस्सुम, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिता सुजय चौधरी, मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सड़क सुरक्षा समन्वयक सैयद एहतिशाम और एमिटी यूनिवर्सिटी ऑनलाइन के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस प्रदीप कुमार सिंह मौजूद रहे।

इसके अलावा गेटवे कंसल्टिंग के सीईओ तुषार गांधी, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ की आहार विशेषज्ञ डॉ. निरुपमा सिंह, कंज्यूमर गिल्ड के अभिषेक श्रीवास्तव, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश स्टेट सेंटर के अध्यक्ष वी. पी. सिंह और कंज्यूमर वॉइस के सलाहकार हेमंत उपाध्याय ने भी भाग लिया।

चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने और कानूनी कार्रवाई के साथ निरंतर जन-शिक्षा तथा लक्षित जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। खासतौर पर युवाओं को नशे की हालत में वाहन चलाने के जोखिमों के प्रति जागरूक करने और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करने पर बल दिया गया।

वॉकथॉन और नुक्कड़ नाटक से दिया सड़क सुरक्षा का संदेश

यह परामर्श लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान का हिस्सा था। अभियान के तहत मोहनलालगंज के न्यू जेल रोड के आसपास एक किलोमीटर लंबी वॉकथॉन आयोजित की गई। इसके साथ नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से सड़क सुरक्षा का संदेश दिया गया।

जनभागीदारी बढ़ाने के लिए सूचना कियोस्क और सेल्फी बूथ भी लगाए गए। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ना और जिम्मेदारी से वाहन चलाने के महत्व को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाना था। विशेष रूप से शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाने से होने वाले खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सिफारिशें संबंधित सरकारी विभागों को भेजी जाएंगी

आयोजकों के अनुसार, परामर्श में सामने आए सुझावों और सिफारिशों को कंज्यूमर वॉइस तथा कंज्यूमर गिल्ड संकलित करेंगे। इसके बाद इन्हें विचार के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ साझा किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के बीच समन्वय बनाए रखना और नशे में वाहन चलाने की घटनाओं को रोकने, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए व्यावहारिक उपायों के विकास एवं क्रियान्वयन में सहयोग देना है।

कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित सड़कें बनाने के लिए केवल नियम और दंड पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए प्रभावी प्रवर्तन, निरंतर जन-जागरूकता, जिम्मेदार व्यवहार और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

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