आंचलिक विज्ञान नगरी में पृथ्वी दिवस का भव्य समापन: डॉ. पंकज श्रीवास्तव बोले— 'आज के बच्चे ही बनेंगे कल के भविष्य निर्माता'

Grand Conclusion of Earth Day at the Regional Science City: Dr. Pankaj Srivastava States—'Today's Children Will Become the Architects of Tomorrow's Future'
 
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लखनऊ: राजधानी के अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान नगरी में दो दिवसीय 'पृथ्वी दिवस' समारोह पुरस्कार वितरण के साथ हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस वर्ष का आयोजन 'हमारी ताकत, हमारा ग्रह' (Our Power, Our Planet) की वैश्विक थीम पर आधारित रहा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवा पीढ़ी को जागरूक किया गया।

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बच्चे हैं भविष्य के 'पालिसी मेकर'

समारोह के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण और प्रदूषण की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा:आज के बच्चे ही कल के नीति निर्माता (Policy Makers) बनेंगे। हमारी पृथ्वी का सुरक्षित भविष्य इन्हीं के हाथों में है, इसलिए उन्हें पर्यावरण के प्रति अभी से संवेदनशील होना आवश्यक है।"

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600 से अधिक छात्रों ने दिखाई प्रतिभा

दो दिवसीय इस उत्सव के दौरान स्कूली बच्चों के लिए जूनियर और सीनियर वर्ग में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया:

  • क्विज प्रतियोगिता: पृथ्वी और पर्यावरण के रहस्यों पर आधारित।

  • पोस्टर मेकिंग: 'हमारी ताकत, हमारा ग्रह' विषय पर बच्चों ने अपनी रचनात्मकता बिखेरी। इस आयोजन में शहर के 20 से अधिक विद्यालयों के 600 से अधिक छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विज्ञान नगरी की प्रदर्शनी का भ्रमण कर विज्ञान को करीब से समझा।

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समर कैंप की घोषणा

विज्ञान नगरी के परियोजना समन्वयक स्वरूप मंडन ने कार्यक्रम के सफल समापन पर जानकारी साझा की कि 19 मई से 10 जून तक विज्ञान नगरी में 'समर कैंप' आयोजित किए जा रहे हैं। इन कैंपों के माध्यम से स्कूली बच्चे विज्ञान से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं को शांत कर सकेंगे और नई तकनीकों के बारे में जान सकेंगे।

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विजेताओं का सम्मान

मुख्य अतिथि डॉ. पंकज श्रीवास्तव, नासी (NASI) के डॉ. आर.डी. गौर और अन्य सदस्यों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि इसमें विशेष रूप से आमंत्रित 'मुक्ति बोध संस्था' के बच्चों को भी सम्मानित किया गया, जिससे आयोजन और भी समावेशी बन गया।

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