शिक्षा का उद्देश्य मानवता की सेवा, रिसर्च और इनोवेशन में आगे बढ़ें विद्यार्थी: आनंदीबेन पटेल
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को मानवता की सेवा के योग्य बनाना है। उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए गुरुकुल, नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षण केंद्रों को देश की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का प्रतीक बताया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव, महर्षि संस्थान के उपाध्यक्ष राहुल भारद्वाज, कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह, मुख्य वित्त अधिकारी वरुण श्रीवास्तव और कुलसचिव डॉ. गिरीश छिमवाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
विद्यार्थियों के इनोवेटिव प्रोजेक्ट देखकर राज्यपाल ने की सराहना
दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की ओर से तैयार विभिन्न नवाचारों और शोध कार्यों की प्रदर्शनी लगाई गई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मिनी एक्सपो का अवलोकन कर विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट की जानकारी ली।
प्रदर्शनी में सामाजिक समस्याओं के समाधान पर आधारित मॉडल, तकनीकी नवाचार, वैदिक विज्ञान से जुड़ी प्रस्तुतियां और शोध कार्य प्रदर्शित किए गए। सॉकर रोबो बोट जैसे तकनीकी प्रोजेक्ट ने विशेष आकर्षण पैदा किया। इसके साथ ही महर्षि महेश योगी के जीवन, विचारों और योगदान पर आधारित शोध कार्य भी प्रस्तुत किए गए।

विद्यार्थियों ने लाइव योग डेमो क्लास के माध्यम से योग की उपयोगिता प्रदर्शित की। वहीं, एनीमेशन के विद्यार्थियों की ओर से तैयार ‘एनिम वर्स’ भी आकर्षण का केंद्र रहा। इन प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और समस्याओं के समाधान के लिए नए विचारों को प्रदर्शित किया गया।
शिक्षा देना सबसे बड़ी समाजसेवा: राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महर्षि संस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों की ओर से किए जा रहे समाजसेवा के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रदान करना अपने आप में सबसे बड़ी सेवा है। इसके साथ ही संस्थान की ओर से समाज के हित में किए जा रहे अन्य कार्य भी महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को शोध और नवाचार के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा, ताकि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज की जरूरतों को पूरा करने में कर सकें।

राज्यपाल के संबोधन में उच्च शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया।
गुरुकुल, नालंदा और तक्षशिला भारत की समृद्ध शिक्षा परंपरा के प्रतीक
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों का निर्माण करना है, जो अपने ज्ञान का उपयोग मानवता की सेवा में कर सकें। उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में गुरुकुल परंपरा के साथ नालंदा और तक्षशिला जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण केंद्र रहे हैं, जो भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत को दर्शाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के सामाजिक महत्व को समझने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज तथा देश के विकास में करने के लिए प्रेरित किया।
जनभवन के 400 बच्चों को मिलेंगी टी-शर्ट
समारोह के दौरान समाजसेवा से जुड़ी पहल के तहत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन, उत्तर प्रदेश के 400 बच्चों के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को टी-शर्ट भेंट की। इस पहल के माध्यम से बच्चों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और शिक्षा के साथ जनकल्याण के महत्व को रेखांकित किया गया।
20 शोधार्थियों को पीएचडी, 1612 विद्यार्थियों ने हासिल की स्नातक डिग्री
सातवें दीक्षांत समारोह में कुल 2279 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए। इनमें 20 शोधार्थियों को पीएचडी, 324 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और 1612 विद्यार्थियों को स्नातक की डिग्री प्रदान की गई। इसके अलावा 323 विद्यार्थियों को डिप्लोमा दिया गया।

दीक्षांत समारोह में डिग्रियां प्रदान करने के साथ विद्यार्थियों के शोध और नवाचार से जुड़े प्रोजेक्ट को प्रदर्शित करने का अवसर भी दिया गया। राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री के संदेशों ने विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुसंधान, रचनात्मकता और समाजसेवा के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
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