श्रीदत्तगंज में शैक्षिक संवाद संगोष्ठी आयोजित, डीएम ने परिणाम आधारित शिक्षण और निपुण भारत मिशन पर दिया जोर
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक सफलता बच्चों के सीखने के परिणामों से मापी जाती है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है कि उसकी कक्षा का हर विद्यार्थी अपनी आयु और कक्षा के अनुरूप पढ़ने, लिखने, समझने तथा गणितीय बुनियादी दक्षताओं में निपुण बने।
उन्होंने शिक्षकों से अध्यापन के दौरान आने वाली चुनौतियों और नवाचारों पर भी चर्चा की। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक, गतिविधि-आधारित और बाल-केंद्रित बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों में सीखने के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित हो। इसके लिए स्थानीय संसाधनों, टीचिंग लर्निंग मटीरियल (टीएलएम) तथा समूह आधारित गतिविधियों का अधिकतम उपयोग करने पर बल दिया।
डॉ. जैन ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का नियमित मूल्यांकन सुनिश्चित करे। जो छात्र अपेक्षित स्तर से पीछे हैं, उनके लिए विशेष रेमेडियल टीचिंग की प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि कोई भी बच्चा सीखने की प्रक्रिया में पीछे न रह जाए। उन्होंने कहा कि जनपद में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत निर्धारित दक्षताओं की शत-प्रतिशत प्राप्ति शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विद्यालयों में अपनाई जा रही नवाचारी शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणाम आधारित शिक्षण के माध्यम से जिले की शैक्षिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी अशोक पाठक सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
