संस्कृत विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार पर जोर, परिषद ने की समीक्षा बैठक
बैठक में विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित करने, स्कूल चलो अभियान को प्रभावी बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-अधिगम सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा की गई। सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परिषद द्वारा जारी शैक्षिक पंचांग के अनुरूप नियमित पठन-पाठन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण और पर्यवेक्षण किया जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप शिक्षण कार्य संचालित करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों को कैरियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए ‘पंख’ पोर्टल पर उनका पंजीकरण कराने और उसका अधिकतम लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में ‘मिशन पहचान’ के अंतर्गत विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए कई नवाचारात्मक गतिविधियों पर जोर दिया गया। तय किया गया कि प्रतिदिन प्रार्थना सभा में एक विद्यार्थी संस्कृत भाषा में ‘आज का सुविचार’ लिखेगा और उसकी व्याख्या भी प्रस्तुत करेगा। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को समाचार पत्रों के अध्ययन और समसामयिक विषयों पर विचार साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ सुविचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को प्रत्येक माह सम्मानित करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
छात्र-छात्राओं में रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और अभिरुचि विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक शनिवार को ‘फन डे’ या ‘आनंदमय दिवस’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान वाद-विवाद प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, सांस्कृतिक गतिविधियां तथा स्थानीय शैक्षिक भ्रमण जैसी गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक बनाया जाएगा।
संस्थागत सुधार के तहत विद्यालयों से प्राप्त विभिन्न संशोधन प्रस्तावों के लिए निर्धारित प्रारूप लागू करने का निर्णय लिया गया। सभी उप निरीक्षकों को निर्देश दिए गए कि विद्यालयों से संबंधित संशोधन प्रस्ताव केवल निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से ही परिषद कार्यालय को भेजे जाएं।
बैठक में एनसीईआरटी के डिजिटल संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को एनसीईआरटी की डिजिटल पुस्तकों, मोबाइल एप और क्यूआर कोड आधारित अध्ययन सामग्री के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही शिक्षकों को ‘माध्यमिक स्तर पर सीखने के प्रतिफल’ पुस्तक का अध्ययन करने की सलाह दी गई, जिससे वे विद्यार्थियों में विकसित की जाने वाली आवश्यक दक्षताओं और सीखने की प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा संस्कृत विद्यालयों को आधुनिक शैक्षिक संसाधनों से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
