बजट 2026 पर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने जताई नाराजगी, कहा- "उम्मीदों पर फिरा पानी
प्रमुख मुद्दे जिन पर बजट रहा मौन
हरि किशोर तिवारी ने बजट का विश्लेषण करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर सरकार को घेरा:
-
आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission): कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इस बजट में आठवें वेतन आयोग के गठन या इसके लिए बजटीय प्रावधान की घोषणा होगी, लेकिन इसका कहीं कोई जिक्र नहीं मिला। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार इस वर्ष इस दिशा में कदम उठाने के मूड में नहीं है।
-
पेंशन व्यवस्था (Pension System): बजट में पुरानी पेंशन बहाली या वर्तमान पेंशन व्यवस्था में सुधार से संबंधित कोई ठोस प्रस्ताव नहीं रखा गया, जिससे लाखों कर्मचारियों में निराशा है।
-
असंगठित क्षेत्र और ईपीएफओ (EPFO): असंगठित क्षेत्र, मानदेय और आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए भी बजट में कुछ खास नहीं रहा। पिछले 12 वर्षों से ईपीएफओ की न्यूनतम पेंशन (1000 रुपये) को बढ़ाने और न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग अधूरी रह गई है।
आयकर और वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार आठवां वेतन आयोग लाने की मंशा रखती, तो निश्चित रूप से आयकर छूट (Income Tax Limit) की सीमा में बड़ी बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाता, जो इस बजट में नहीं दिखा।
इसके अलावा, उन्होंने रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायतों का मुद्दा भी उठाया। कोरोना काल के दौरान बंद की गई इन सुविधाओं को दोबारा बहाल न करना बुजुर्गों के साथ अन्याय बताया गया है।
बजट
कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों की अनदेखी की गई है। न तो वेतन वृद्धि का कोई रोडमैप है और न ही सामाजिक सुरक्षा के ठोस इंतजाम। वरिष्ठ नागरिकों और आउटसोर्सिंग कर्मियों की उपेक्षा इस बजट का सबसे कमजोर पहलू है।" — हरि किशोर तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष
