बॉलीवुड सितारे भी नहीं डिजिटल ठगी से सुरक्षित! कीर्ति कुल्हारी से अंकुश बहुगुणा तक, जानिए सेलिब्रिटीज से जुड़े साइबर स्कैम के मामले

क्रेडिट कार्ड से लाखों के कथित अनधिकृत लेनदेन से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक के मामले आए सामने, अक्टूबर में साइबर सुरक्षा जागरूकता का संदेश

 
बॉलीवुड सितारे भी नहीं डिजिटल ठगी से सुरक्षित! कीर्ति कुल्हारी से अंकुश बहुगुणा तक, जानिए सेलिब्रिटीज से जुड़े साइबर स्कैम के मामले

मुंबई, अक्टूबर 2026। बॉलीवुड और मनोरंजन जगत में स्कैम पर आधारित फिल्मों और वेब सीरीज को दर्शकों का खूब प्यार मिला है। जामतारा: सबका नंबर आएगा में फोन के जरिए होने वाली ठगी से लेकर स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी और स्कैम 2003: द टेल्गी स्टोरी तक, पर्दे पर धोखाधड़ी के कई रूप दिखाए गए हैं। लेकिन जब ऐसी घटनाएं वास्तविक जिंदगी में लोकप्रिय कलाकारों और सोशल मीडिया हस्तियों के साथ होती हैं, तो यह मनोरंजन से आगे बढ़कर डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी बन जाती हैं।

हाल के वर्षों में कई चर्चित हस्तियों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। इन घटनाओं से साफ होता है कि डिजिटल ठगी का खतरा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ ऐसी घटनाएं मानसिक तनाव और निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ाती हैं।

कीर्ति कुल्हारी के क्रेडिट कार्ड से 2.43 लाख रुपये के कथित अनधिकृत लेनदेन

अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी ने अपने क्रेडिट कार्ड से 2.43 लाख रुपये के कथित अनधिकृत अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का मामला साझा किया था। हिंदुस्तान टाइम्स को अगस्त 2026 में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान उनके कार्ड से डॉलर में भुगतान होने का नोटिफिकेशन आया।

इस घटना ने डिजिटल भुगतान की सुरक्षा और अनजान लेनदेन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत को सामने रखा। आज मोबाइल फोन में बैंकिंग, खरीदारी, निजी संवाद और कई महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ी जानकारी मौजूद रहती है। ऐसे में किसी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते पहचानना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

अंकुश बहुगुणा को डिजिटल अरेस्ट स्कैम में बनाया गया निशाना

कंटेंट क्रिएटर अंकुश बहुगुणा ने जनवरी 2025 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े अपने अनुभव के बारे में बताया था। उनके मुताबिक, ठगों ने उन्हें करीब 40 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा।

डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में जालसाज खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे गिरफ्तारी का भय दिखाकर पीड़ितों पर पैसे भेजने या निजी जानकारी साझा करने का दबाव बना सकते हैं। ऐसे मामलों में यह समझना जरूरी है कि वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति का वर्दी में दिखाई देना या सरकारी अधिकारी होने का दावा करना उसकी वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं है।

पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने भी साझा किया आर्थिक नुकसान का अनुभव

टेलीविजन कलाकार पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने भी वित्तीय धोखाधड़ी के कारण अपनी बचत गंवाने की बात कही थी। पूजा ने उस कठिन समय को याद करते हुए बताया था कि उनके परिवार के लिए पिछले दो-तीन महीने बेहद मुश्किल रहे और उन्हें भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।

वहीं, टीवी अभिनेता राहुल सिंह तोमर ने एक अन्य मामले में कथित तौर पर अनजान व्यक्ति के फोन कॉल के बाद 85 हजार रुपये गंवाने की जानकारी दी थी। एबीपी लाइव के अनुसार, उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने अपना ओटीपी या यूपीआई पिन साझा नहीं किया था।

ये मामले इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं कि डिजिटल धोखाधड़ी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। इसलिए केवल गोपनीय जानकारी साझा न करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संदिग्ध कॉल, भुगतान अनुरोध और बैंकिंग गतिविधियों को लेकर भी सतर्क रहना जरूरी है।

पर्दे पर स्कैम की कहानियां, असल जिंदगी में जरूरी सबक

जामतारा, स्कैम 1992 और स्कैम 2003: द टेल्गी स्टोरी जैसी वेब सीरीज ने अलग-अलग तरह की धोखाधड़ी को व्यापक चर्चा का विषय बनाया है। हालांकि, वास्तविक जीवन में ठगी किसी तय पटकथा के अनुसार नहीं होती। कभी अनजान फोन कॉल, कभी फर्जी लिंक, कभी संदिग्ध भुगतान अनुरोध और कभी सरकारी अधिकारी बनकर डराने की कोशिश के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता है।

अक्टूबर को साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में मनोरंजन जगत से जुड़े ये अनुभव डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश देते हैं। मशहूर हस्तियां हों या आम नागरिक, कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो सकता है।

डिजिटल ठगी से बचने के लिए रखें इन बातों का ध्यान

  • ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करें: बैंक या भुगतान सेवा के नाम पर फोन करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति को गोपनीय जानकारी न दें।

  • संदिग्ध लिंक से बचें: अनजान मैसेज, ईमेल या सोशल मीडिया संदेश में आए लिंक पर क्लिक करने से पहले उनकी प्रामाणिकता जांचें।

  • डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से सावधान रहें: गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पैसे मांगने वाले व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें।

  • बैंकिंग अलर्ट पर तुरंत ध्यान दें: किसी अनजान लेनदेन का संदेश मिलने पर बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर कार्ड या खाते की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करें।

  • साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है।

डिजिटल दुनिया ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ सतर्कता की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। सेलिब्रिटीज से जुड़े ऐसे मामले याद दिलाते हैं कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि हर डिजिटल उपयोगकर्ता की रोजमर्रा की जरूरत है।

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