ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का तेलंगाना में विस्तार: डॉ. सुषमा देवी और के. राजन्ना सह-संयोजक, अरशद मुहीयुद्दीन प्रवक्ता मनोनीत
हैदराबाद (तेलंगाना) | 02 अप्रैल 2026
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन (GPA) के राष्ट्रीय स्तर पर फैलाव के अभियान ने अब दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। 'डेली हिंदी मिलाप' समाचार पत्र के कार्यालय में आयोजित एक विशेष बैठक में तेलंगाना प्रदेश कार्य समिति के गठन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय और स्थानीय पदाधिकारियों ने शिरकत की।
महत्वपूर्ण नियुक्तियां और संगठनात्मक विस्तार
बैठक में सर्वसम्मति से संगठन को मजबूती देने के लिए निम्नलिखित पदाधिकारियों को मनोनीत किया गया:
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सह-संयोजक (तेलंगाना): डॉ. सुषमा देवी एवं के. राजन्ना।
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प्रदेश प्रवक्ता (तेलंगाना): अरशद मुहीयुद्दीन।
प्रदेश संयोजक एफ.एम. सलीम ने बताया कि तेलंगाना के विभिन्न जिलों में ग्रामीण पत्रकारों से संपर्क का कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही एक सशक्त प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी।
पत्रकार हितों और सामाजिक दायित्वों पर मंथन
बैठक के दौरान राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अतुल कपूर ने संगठन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एसोसिएशन का मुख्य लक्ष्य दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों को एक साझा और सशक्त मंच प्रदान करना है।
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प्रमुख विषय: पत्रकारों की सुरक्षा, प्रशिक्षण (Training), सम्मान और उनके सामाजिक दायित्वों पर गंभीर मंथन किया गया।
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भविष्य की योजना: आने वाले समय में संगठन द्वारा पत्रकारों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय फलक पर GPA की बढ़ती धमक
अतुल कपूर ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष देवी प्रसाद गुप्ता के मार्गदर्शन में संगठन का विस्तार युद्धस्तर पर जारी है:
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वर्तमान में 7 राज्यों में विधिवत प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हो चुका है।
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4 अन्य राज्यों में संयोजकों की नियुक्ति के साथ गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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हाल ही में 15 मार्च को उत्तर प्रदेश के बिजनौर (नूरपुर) में आयोजित सम्मेलन की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर संगठन की एकजुटता का परिचय दिया।
हैदराबाद में हुई इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत के पत्रकारों की आवाज बनने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के अभाव में काम करने वाले पत्रकारों के लिए इस तरह के संगठन का विस्तार एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा।
