मातृ मृत्यु दर रोकने को विशेषज्ञों का महामंथन: जटिल प्रसव और PPH नियंत्रण के लिए डॉक्टरों को दी गई आधुनिक ट्रेनिंग

Experts Deliberate on Curbing Maternal Mortality: Doctors Receive Advanced Training for Managing Complex Deliveries and Controlling PPH.
 
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लखनऊ | 12 अप्रैल 2026: सुरक्षित मातृत्व और सामान्य प्रसव (Normal Delivery) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय 'फॉग्सी आर्ट ऑफ बर्थिंग कॉन्क्लेव 2026' का रविवार को सफल समापन हुआ। कॉन्क्लेव के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) के प्रभावी नियंत्रण और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के सुरक्षित प्रबंधन पर विशेष जोर दिया

PPH नियंत्रण: समय पर सही इंजेक्शन बचा सकता है जान

प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने अपने सत्र में 'यूटेराइन काइनेटिक्स' पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रसव के दौरान यूटेरोटोनिक्स इंजेक्शन का सही समय पर उपयोग जीवनरक्षक साबित होता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक बच्चेदानी के संकुचन को प्रभावी बनाकर प्रसव के बाद होने वाले भारी रक्तस्राव (PPH) को रोक सकती है। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर कार्यरत स्टाफ के व्यावहारिक प्रशिक्षण को अनिवार्य बताया।

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जटिल परिस्थितियों में सुरक्षित प्रसव संभव: डॉ. मुखोपाध्याय

डॉ. आशीष मुखोपाध्याय ने ब्रीच (उल्टा बच्चा) और प्रीटर्म लेबर (समय से पूर्व प्रसव) जैसे चुनौतीपूर्ण मामलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और सही क्लिनिकल निर्णय से रेफरल के बोझ को कम किया जा सकता है और जमीनी स्तर पर भी सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है।

सिजेरियन की जरूरत कम करेंगी रोटेशन तकनीकें

डॉ. एन. पलानीअप्पन ने 'ऑक्सिपिटोपोस्टेरियर पोजीशन' (बच्चे की विशेष स्थिति) के प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि रोटेशन तकनीकों के माध्यम से बच्चे की स्थिति को अनुकूल बनाया जा सकता है, जिससे अनावश्यक सिजेरियन ऑपरेशन से बचा जा सकता है और सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ जाती है।

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विशेषज्ञों का साझा संदेश: ट्रेनिंग और टीम वर्क है जरूरी

  • डॉ. प्रीति कुमार: कॉन्क्लेव का मुख्य लक्ष्य स्वास्थ्यकर्मियों को स्किल-आधारित प्रशिक्षण देकर मातृत्व सेवाओं को अभेद्य बनाना है।

  • डॉ. सीमा मेहरोत्रा: जटिल स्थितियों में टीम वर्क और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ही बेहतर परिणाम सुनिश्चित करती है।

पैनल चर्चा: गंभीर रोगों के बीच प्रसव प्रबंधन

समारोह में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित हुई। इसमें डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. संपत कुमारी, डॉ. नीरा अग्रवाल, डॉ. जतिंदर कौर और डॉ. गौरव देसाई ने हिस्सा लिया। चर्चा के मुख्य बिंदु रहे:

  • फीटल ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन (FGR) और प्रीटर्म लेबर।

  • गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, गंभीर एनीमिया और हृदय रोग का प्रबंधन।

  • जटिल सिजेरियन के दौरान ब्लैडर इंजरी और अत्यधिक रक्तस्राव से निपटने के कौशल।

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महानिदेशक परिवार कल्याण ने की सराहना

समापन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. एच. डी. अग्रवाल (महानिदेशक, परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश) और विशिष्ट अतिथि डॉ. हेमांग शाह ने इस पहल को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर बताया। विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि निरंतर प्रशिक्षण ही मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी लाने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।

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