NHB की पॉलीहाउस योजना को लेकर 10 राज्यों के किसानों का विरोध, स्पष्ट नियम और लंबित मंजूरियों के निपटारे की मांग
लखनऊ, 25 सितंबर 2026। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की पॉलीहाउस एवं संरक्षित खेती से जुड़ी योजनाओं को लेकर किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सहायता राशि, पात्रता नियमों में बदलाव और लंबित मंजूरियों के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया है। प्रदर्शन से जुड़े किसानों का आरोप है कि नई Grant of Clearance (GoC) प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता के कारण प्रस्तावित और लंबित परियोजनाओं पर असर पड़ रहा है।
NHB की वेबसाइट पर 21 अगस्त 2026 को योजना संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन दर्ज है। इसके अलावा बोर्ड ने 3 सितंबर 2026 के एक परिपत्र में Scheme No. 1 और Scheme No. 2 के तहत नई GoC अर्जियां प्राप्त करने पर अस्थायी रोक की जानकारी दी है।
किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि आवेदन और मंजूरी प्रक्रिया में देरी से नई पॉलीहाउस परियोजनाओं की शुरुआत प्रभावित हो सकती है। उनका दावा है कि इससे बैंक ऋण ले चुके किसानों, निर्माता एवं आपूर्तिकर्ताओं तथा निर्माण से जुड़ी टीमों के सामने भी वित्तीय और रोजगार संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
10 राज्यों में विरोध का दावा
आंदोलन से जुड़े आयोजकों के अनुसार, किसानों ने साझा अभियान के तहत 11 शहरों में NHB कार्यालयों के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इनमें अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर, चेन्नई तथा महाराष्ट्र के पुणे और नाशिक शामिल बताए गए हैं।
प्रदर्शन में किसानों के अलावा ग्रीनहाउस निर्माता, फिल्म एवं नेट सप्लायर तथा पॉलीहाउस निर्माण से जुड़ी टीमें भी शामिल हुईं।
किसानों का कहना है कि परियोजनाओं की मंजूरी में देरी होने से पहले से स्वीकृत बैंक ऋण की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में ऋण का पुनर्मूल्यांकन, अतिरिक्त शर्तें या अन्य वित्तीय जटिलताएं सामने आ सकती हैं।
21 अगस्त के सर्कुलर पर आपत्ति
किसानों ने साझा ज्ञापन के माध्यम से 21 अगस्त को जारी संशोधित दिशानिर्देशों को वापस लेने या उन पर पुनर्विचार करने, पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए सहायता राशि को 50 प्रतिशत किए जाने और भविष्य में किसी भी बड़े बदलाव से पहले किसानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने GoC की प्रतीक्षा कर रहे आवेदकों, बैंक ऋण स्वीकृत करा चुके किसानों, निर्माणाधीन परियोजनाओं और सहायता की प्रतीक्षा कर रहे तैयार फार्मों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
उनका कहना है कि सरकारी योजना के आधार पर निवेश, ऋण और निर्माण की तैयारी कर चुके किसानों के लिए नीतिगत बदलाव और प्रशासनिक अनिश्चितता अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण बन सकती है।
सात दिन में लिखित जवाब की मांग
आंदोलन से जुड़े किसानों ने NHB से सात दिनों के भीतर लिखित जवाब देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो NHB मुख्यालय, गुरुग्राम में फिर बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
आयोजकों ने मौजूदा अभियान को 15 और 16 सितंबर को हुई लामबंदी की अगली कड़ी बताया है। उनके अनुसार, 15 सितंबर को गुरुग्राम और 16 सितंबर को कृषि मंत्रालय के समक्ष किसानों ने अपनी मांगें रखी थीं।
पुराने आवेदनों और निवेश को सुरक्षित रखने की मांग
किसानों ने मांग की है कि 21 अगस्त के संशोधन से पहले के पात्र आवेदन, जारी या लंबित GoC तथा दस्तावेजों से प्रमाणित पुराने वित्तीय दायित्वों को पूर्व व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखा जाए।
इसके साथ ही उन्होंने बैंक ऋण की मंजूरी से लेकर निर्माण, निरीक्षण और अंतिम दावे तक प्रत्येक चरण के नियमों को लिखित रूप में स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासनिक देरी के कारण बैंक की समय-सीमा या परियोजना पूरी करने की निर्धारित अवधि प्रभावित हुई है तो किसानों को अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।
भागीरथ चौधरी से जुड़े सब्सिडी मामले का भी मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से जुड़े पॉलीहाउस/खीरा परियोजना की सब्सिडी का मामला भी उठाया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चौधरी की राजस्थान स्थित खीरा खेती परियोजना को NHB की योजना के तहत करीब ₹99 लाख की सहायता मिली थी। NHB में कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं।
सरकार ने जुलाई 2026 में लोकसभा में बताया था कि भागीरथ चौधरी ने संबंधित सब्सिडी बैंक को वापस कर दी है और बैंक को यह राशि NHB को लौटाने के लिए कहा गया है।
वहीं, चौधरी ने मीडिया को दिए बयानों में कहा था कि उन्होंने योजना के नियमों का पालन किया और यह भी कहा था कि उन्होंने आवेदन पहले किया था तथा परियोजना से संबंधित जानकारी छिपाई नहीं थी।
किसानों का सवाल है कि इस प्रकरण के बाद किए गए नीतिगत बदलावों का आधार और औचित्य सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए तथा जिन किसानों का इस मामले से कोई संबंध नहीं है, उन पर इसका आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
सहायता दर और पात्रता नियमों पर स्पष्टीकरण की मांग
किसानों ने सहायता की दर के साथ-साथ परिवार और किसान समूह की पात्रता को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि पात्रता वास्तविक परियोजना और उसके दस्तावेजी प्रमाण के आधार पर तय हो तथा दोहरे लाभ को रोकने के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।
इसके अलावा आवेदन शुल्क, GST और जमीन की लागत से जुड़े नियमों को सरल एवं स्पष्ट बनाने की मांग भी की गई है।
किसानों का प्रस्ताव है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले प्रभावित किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया जाए तथा नए नियमों के अनुपालन के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
सहायता राशि में बदलाव को लेकर किसानों की आपत्ति
किसानों का दावा है कि अगस्त में किए गए संशोधनों के बाद सामान्य क्षेत्रों में सहायता 50 प्रतिशत से घटकर 35 प्रतिशत हो गई है। उनका कहना है कि इससे परियोजनाओं के लिए किसानों को अतिरिक्त पूंजी जुटानी पड़ सकती है, बैंक प्रस्तावों में बदलाव करना पड़ सकता है या परियोजना का आकार कम करना पड़ सकता है।
NHB की वेबसाइट पर 21 अगस्त 2026 के संशोधित दिशानिर्देशों का उल्लेख उपलब्ध है।
किसानों ने पुराने पात्र मामलों को पूर्व नियमों के अनुसार निपटाने के साथ प्रत्येक लंबित चरण के लिए स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
GoC प्रक्रिया की समय-सीमा सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने GoC व्यवस्था में आवेदन शुरू होने की तारीख और निर्णय मिलने की संभावित समय-सीमा सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने नए आवेदन स्वीकार किए जाने का कार्यक्रम, लंबित मंजूरियों और सब्सिडी दावों के निपटारे की समय-सीमा तथा दस्तावेजों में कमी होने पर आवेदक को तत्काल सूचना देने की व्यवस्था की मांग रखी।
NHB की वेबसाइट पर 6 मई 2026 का एक परिपत्र GoC आवेदन, सब्सिडी दावों और शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा निर्धारित करने से संबंधित बताया गया है।
किसानों का कहना है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आवेदकों को बार-बार कार्यालयों और अधिकारियों से जानकारी लेने के लिए मजबूर न होना पड़े।
18 प्रतिशत GST को 5 प्रतिशत करने की मांग
आंदोलन से जुड़े किसानों ने पॉलीहाउस परियोजनाओं की लागत कम करने के उद्देश्य से निर्धारित पॉलीहाउस सामग्री एवं आपूर्तियों पर लागू GST को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने तथा संबंधित कर श्रेणी को स्पष्ट करने की मांग भी रखी है।
उन्होंने परियोजनाओं के लिए मान्य लागत मानकों को मौजूदा बाजार कीमतों के अनुरूप संशोधित करने की मांग की है। किसानों के अनुसार, सामग्री और परिवहन लागत में बदलाव को भी लागत निर्धारण के दौरान ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसके अलावा पॉलीहाउस योजना के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का अलग बजटीय प्रावधान करने और योजना के तहत जारी, खर्च तथा लंबित राशि की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
किसानों ने NHB और कृषि मंत्रालय से पॉलीहाउस परियोजनाओं की मंजूरी, सहायता राशि और आवेदन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि लंबित मंजूरियों का समयबद्ध निपटारा, स्पष्ट नियम, पुराने निवेश की सुरक्षा और नई परियोजनाओं के लिए पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित कराना है।
आंदोलन से जुड़े किसानों ने NHB और कृषि मंत्रालय से जल्द लिखित जवाब और व्यावहारिक समाधान की मांग की है।
