UPI लेनदेन पर शुल्क का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका, अमरनाथ मिश्र ने सरकार से वहन करने की मांग की

Concerns arise that the burden of charges on UPI transactions may fall on consumers; Amarnath Mishra urges the government to bear the cost.
 
UPI लेनदेन पर शुल्क का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका, अमरनाथ मिश्र ने सरकार से वहन करने की मांग की

लखनऊ। UPI लेनदेन से जुड़े संभावित शुल्क को लेकर व्यापारी वर्ग की ओर से चिंता जताई गई है। अमरनाथ मिश्र ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार को UPI से संबंधित वार्षिक खर्च स्वयं वहन करना चाहिए, ताकि इसका अतिरिक्त भार उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर न पड़े।

अमरनाथ मिश्र के अनुसार, भारत में प्रतिदिन UPI के माध्यम से करीब 96 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन होता है, जबकि उन्होंने सरकार पर इससे संबंधित लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के सालाना खर्च का उल्लेख किया। उनका कहना है कि यदि इस खर्च की भरपाई उपभोक्ताओं या व्यापारियों से शुल्क के माध्यम से की जाती है तो इसका सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है।

शुल्क का भार अंततः उपभोक्ता पर पड़ने की चिंता

अमरनाथ मिश्र ने कहा कि यदि 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है, तो इसका आर्थिक भार अंततः उपभोक्ता पर पड़ने की संभावना है। उनके अनुसार, सामान्य व्यापारिक व्यवस्था में कोई भी व्यापारी लंबे समय तक अतिरिक्त शुल्क अपनी जेब से वहन नहीं करता। ऐसी स्थिति में वह ग्राहक से अतिरिक्त राशि वसूल सकता है या फिर बड़े मूल्य के डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने से बच सकता है।

उन्होंने कहा कि बैंकों की ओर से पहले से ही विभिन्न बैंकिंग सेवाओं और लेनदेन से जुड़े शुल्क लिए जाते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है।

व्यापारिक गतिविधियों पर असर की आशंका

अमरनाथ मिश्र ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में व्यापारिक गतिविधियों पर पहले से दबाव है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले से विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों, शुल्कों तथा सरचार्ज का प्रावधान किया गया है। ऐसे में UPI जैसे डिजिटल भुगतान माध्यम पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालने के बजाय सरकार को इसके खर्च को वहन करने पर विचार करना चाहिए।

अमरनाथ मिश्र ने सरकार से मांग की कि UPI लेनदेन को कम लागत और सुगम बनाए रखने के लिए शुल्क संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिलता रहे और इसका अतिरिक्त भार आम उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों पर न पड़े।

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