शत्रु संपत्ति को निजी नाम दर्ज कराने के आरोप में पूर्व एसडीएम समेत आठ पर एफआईआर के आदेश
अदालत ने 4 अगस्त को पारित आदेश में तरबगंज पुलिस को मामले की निष्पक्ष विवेचना करने तथा एफआईआर दर्ज होने के 10 दिन के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
0.138 हेक्टेयर भूमि के रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप
गौहानी गांव निवासी अजय कुमार पांडेय और राजू सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि गांव में करीब 0.138 हेक्टेयर भूमि ऐसे परिवार के नाम दर्ज थी, जिसके सदस्य वर्ष 1945 से पहले पाकिस्तान चले गए थे। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में संबंधित भूमि शत्रु संपत्ति के दायरे में आती थी।
आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के बाद कथित तौर पर कूटरचना और धोखाधड़ी के माध्यम से राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया।
जमीन बेचने और निर्माण कराने का भी आरोप
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव के बाद विवादित जमीन की बिक्री कर दी गई। इसके बाद भूमि पर निर्माण कार्य भी शुरू कराया गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
पूर्व एसडीएम सहित आठ लोगों के खिलाफ कार्रवाई
मामले की सुनवाई के बाद सीजेएम ने तत्कालीन एसडीएम तरबगंज विश्वामित्र सिंह, तत्कालीन आरआरके, गौहानी के तत्कालीन हल्का लेखपाल तथा स्वामीनाथ, ओमप्रकाश, रामदयाल, राजेश कुमार और गीता देवी के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
विश्वामित्र सिंह वर्तमान में सिद्धार्थनगर में तैनात बताए जा रहे हैं।
10 दिन में जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
अदालत ने तरबगंज पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए 10 दिन के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
वहीं, तरबगंज थाना प्रभारी श्रीधर पाठक ने बताया कि अभी तक न्यायालय का आदेश थाने में प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
