हौसलों की उड़ान: घरों में झाड़ू-पोछा करने वाली माँ की बेटी ने पास की NEET परीक्षा, पिता के इलाज न मिल पाने के दर्द को बनाया ताकत
लखनऊ: मेरे पिता का निधन सिर्फ इसलिए हो गया क्योंकि हमारे पास उनके सही इलाज के लिए पैसे नहीं थे। उस दिन मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। मैंने उसी पल संकल्प लिया कि मैं डॉक्टर बनूँगी, ताकि किसी और गरीब परिवार को पैसों की तंगी के कारण अपने किसी बेहद प्रिय इंसान को न खोना पड़े।"
ये भावुक शब्द लखनऊ की होनहार नीलू के हैं, जिसने अपनी विपरीत परिस्थितियों को मात देकर देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में सफलता हासिल की है. नीलू अब डॉक्टर बनने के अपने सपने के बेहद करीब हैं और मेडिकल कॉलेज में दाखिले की तैयारियों में जुटी हैं.
अभावों के बीच शुरू हुआ सफर, स्कूल ने दिया 'पंख'
लखनऊ के गोमती नगर स्थित डिगडिगा गाँव की रहने वाली नीलू की यह यात्रा आसान नहीं थी. जब वह महज़ आठवीं कक्षा में थीं, तब इलाज के अभाव में उनके पिता का साया सिर से उठ गया. परिवार में कमाने वाली उनकी माँ अकेली बचीं, जो एक अस्पताल में सहायक (असिस्टेंट) के तौर पर काम करने के साथ-साथ दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करके किसी तरह घर चलाती हैं.
नीलू की शुरुआती शिक्षा 'स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन' (SHEF) द्वारा संचालित प्रेरणा गर्ल्स स्कूल से हुई. किंडरगार्टन से ही बेहद मेधावी रहीं नीलू को उनकी प्रतिभा के दम पर 11वीं कक्षा में 'स्टडी हॉल स्कूल' में पूरी स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) मिल गई. यहाँ से उन्होंने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 94% अंक हासिल करने के साथ-साथ नीट (NEET) की भी कड़ी तैयारी की.
देश के केवल 50 बच्चों में चयन, मिली प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप
नीलू की इस शानदार सफलता में उनकी आर्थिक बाधाएं आड़े न आएं, इसके लिए उन्हें देश की प्रतिष्ठित 'वहानी स्कॉलरशिप' के लिए चुना गया है. पूरे देश से आए हजारों आवेदनों में से केवल 50 सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों को इस छात्रवृत्ति के लिए चुना गया, जिनमें नीलू भी एक हैं. यह स्कॉलरशिप उनकी मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ट्यूशन फीस और अन्य सभी शैक्षणिक खर्चों को वहन करेगी.
सामाजिक रूढ़ियों से लड़ीं माँ
पिता की मौत के बाद समाज और रिश्तेदारों ने नीलू की माँ पर दबाव बनाया कि वे बेटियों की पढ़ाई बंद कराकर उनकी शादी कर दें. लेकिन माँ ने हिम्मत नहीं हारी और प्रेरणा गर्ल्स स्कूल के सहयोग पर भरोसा जताते हुए अपनी बेटियों की शिक्षा जारी रखी. नीलू कहती हैं, "मुझे समझ आ गया था कि हमारे परिवार की किस्मत सिर्फ और सिर्फ शिक्षा ही बदल सकती है। हर मुश्किल ने मुझे और ज्यादा मेहनत करने की ताकत दी।"
संस्थापकों और गुरुओं को नीलू पर गर्व
नीलू की इस अद्वितीय सफलता पर स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. उर्वशी साहनी ने गर्व जताते हुए कहा नीलू की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि प्रतिभा हर वर्ग और हर जगह मौजूद है, बस ज़रूरत सही अवसरों की होती है। जब बेटियों को सही शिक्षा, प्रोत्साहन और खुलकर सपने देखने की आज़ादी मिलती है, तो वे न केवल अपना बल्कि पूरे समाज का भाग्य बदल देती हैं।"
वहीं, स्टडी हॉल स्कूल की प्रधानाचार्या मीनाक्षी बहादुर ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बोर्ड परीक्षा और नीट जैसी देश की सबसे मुश्किल परीक्षा की एक साथ तैयारी करना और उसमें शानदार सफलता पाना सचमुच हम सभी के लिए प्रेरणादायी है.
अब लक्ष्य: हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) बनना
आज नीलू का सपना सिर्फ एक सामान्य डॉक्टर बनने का नहीं है. वह आगे चलकर एक बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) बनना चाहती हैं. उनका अंतिम लक्ष्य यह है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को समय पर मुफ्त या बेहद कम खर्च पर इलाज मुहैया करा सकें, ताकि पैसों की कमी के कारण किसी और बच्चे के सिर से उसके पिता का साया न उठे.
