अगले एक हजार वर्षों तक विश्व में बजेगा भारत और सनातन धर्म का डंका : योगी आदित्यनाथ
मुरथल में मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं अष्ट मान भंडारा में बोले सीएम योगी
भारत की सनातन और आध्यात्मिक विरासत का आधार है नाथ पंथ
सोनीपत/लखनऊ, 22 जनवरी : गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लव जिहाद, अवैध धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रों में लिप्त तत्वों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि हमारी बेटियों के सम्मान और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे षड्यंत्रों के प्रति सजग रहना होगा और इनके प्रतिकार के लिए पूज्य साधु-संतों को भी आगे आना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में आयोजित नाथ संप्रदाय की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं अष्ट मान के भव्य भंडारा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने वाले “कालनेमि” तत्वों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। धर्म ही उसकी संपत्ति है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान। यदि कोई राष्ट्रीय स्वाभिमान को चुनौती देता है तो उसके विरुद्ध खुलकर खड़ा होना ही धर्म है।
अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर सख्त रुख
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि अवैध धर्मांतरण, डेमोग्राफी बदलने की साजिश और लव जिहाद के नाम पर हो रहे कृत्यों को पूरी शक्ति और जागरूकता के साथ रोका जाएगा। उन्होंने वर्ष 2009 में केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि लव जिहाद को तब एक षड्यंत्र बताया गया था और आज इसके दुष्परिणाम कई राज्यों में दिखाई दे रहे हैं।उन्होंने संयुक्त परिवार प्रणाली के विघटन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कार, परिवार और सांस्कृतिक चेतना से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है, इसलिए इस परंपरा को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
नाथ पंथ भारत की प्राचीनतम आध्यात्मिक परंपराओं में से एक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म और भारत की आध्यात्मिक विरासत में नाथ पंथ का विशेष स्थान है। यह परंपरा समाज को जोड़ने, जीवन को सार्थक बनाने और राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देती रही है। उन्होंने मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं भव्य भंडारे के आयोजन को गुरु परंपरा और जनभावनाओं का सम्मान बताते हुए सराहनीय बताया।नाथ संप्रदाय और योगी सभा की ओर से उपस्थित संतों, योगियों और श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि नाथ परंपरा ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया है।
एक भारत–श्रेष्ठ भारत की ओर अग्रसर देश
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का सपना साकार हो रहा है। लगभग एक हजार वर्षों की गुलामी के बाद भारत पुनः अपने वैभव की ओर बढ़ रहा है। आज़ादी के अमृत काल में भारत और सनातन धर्म का उत्थान एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। सनातन धर्म जितना सशक्त होगा, वैश्विक मानवता के कल्याण का मार्ग उतना ही मजबूत होगा।
अयोध्या, काशी और प्रयागराज बने भारत की पुनर्जागरण के प्रतीक
मुख्यमंत्री ने राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज का उल्लेख करते हुए कहा कि आज करोड़ों श्रद्धालु बिना भय और अव्यवस्था के दर्शन और स्नान कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि एक दिन में जितने श्रद्धालु प्रयागराज या अयोध्या आते हैं, उतनी आबादी कई देशों की नहीं है। यह भारत की आस्था और सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है।उन्होंने कहा, “आठवीं से उन्नीसवीं सदी तक भारत ने आक्रांताओं का सामना किया, अब आने वाले एक हजार वर्ष भारत और सनातन धर्म के हैं। पूरी दुनिया में भारत का डंका बजेगा।”
नशा, जल संरक्षण और युवा पीढ़ी पर चिंता
सीएम योगी ने नशे को देश की युवा पीढ़ी को कमजोर करने का षड्यंत्र बताते हुए कहा कि सीमा पार से आने वाला ड्रग राष्ट्रविरोधी ताकतों की साजिश है। समाज को संगठित होकर इसके विरुद्ध खड़ा होना होगा।उन्होंने नदियों और तालाबों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जल संरक्षण के बिना भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता और हरियाणा में सरस्वती नदी के पुनर्जीवन के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवन एवं आरती की। भगवान गोरक्षनाथ की प्रतिमा भेंट कर उनका स्वागत किया गया। उन्होंने आयोजन के संरक्षक बाबा मत्स्यनाथ धाम के महंत योगी बालकनाथ महाराज तथा आयोजक बाबा नागे वाला धाम के महंत बालयोगी मसारनाथ जी महाराज को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर हरियाणा के जनप्रतिनिधियों, संत समाज और देशभर से आए श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति रही।
ये संत रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं अष्ट मान भंडारा में नाथ संप्रदाय के अनेक संत उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से महंत चैताईनाथ, महंत कृष्णनाथ, महंत समुद्रनाथ, महंत पीर शेरनाथ, महंत जटाईनाथ, महंत राजनाथ, महंत लहरनाथ, महंत पूर्णनाथ, महंत हरिनाथ सहित कई सिद्ध योगी और महंत शामिल रहे।




